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स्टूडेंट्स ने रेजीडेंसी में सुनी गदर की कहानी

Mon, 02 Dec 2013 01:08 AM IST
नरेंद्र नारायण/लखनऊ
नरेंद्र नारायण/लखनऊ Updated Mon, 02 Dec 2013 01:08 AM IST
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heritage walk in residency
स्कूली बच्चों के लिए रविवार का नजारा कुछ अलग ही था। अब किताबों में 1857 की क्रांति की कहानियां पढ़ने वाले बच्चों ने रेजीडेंसी में गदर के चिन्ह देखे।
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ब्रिटिश हुकूमत के समय बनवाए गए भवनों के अवशेष देख बच्चे रोमांचित हो उठे। रेजीडेंसी में आजादी की वीरगाथा की कहानियां सुनते हुए इमारतों को देख रहे बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था।

मौका था इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज लखनऊ चैप्टर की तरफ से हेरिटेज वॉक द रेजिडेंसी 1857 की क्रांति की प्राचीन यादों को ताजा करने का।
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इस मौके पर हैप्पी ऑवर्स इंटर कॉलेज के स्टूडेंट्स को शिक्षकों व विशेषज्ञों ने गदर की कहानियां सुनाईं। हेरिटेज वॉक रविवार दोपहर दो बजे से रेजीडेंसी के मुख्य गेट से शुरू हुआ।
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इतिहासकार रवि भट्ट ने बच्चों को 1857 की क्रांति के समय के संरक्षित स्थानों व इमारतों के अवशेष दिखाए। उन्होंने स्टूडेंट्स को बताया कि रेजीडेंसी में ब्रिटिश सेना के चार प्रमुख नुमाइंदों को भारत के शूरवीरों ने यहीं मौत के घाट उतारा था।

1857 की क्रांति में ब्रिटिश सेना प्रमुख सर हेनरी लारेंस, हैवलक, हार्सन, जनरल नी प्रमुख थे। 30 मई 1857 को गोमती के किनारे मड़ियांव में ब्रिटिश सेना की टुकड़ी पर क्रांतिकारियों ने हमलाकर ब्रिटिश सेना के अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया था।

वहां से भागकर ब्रिटिश सेना के अफसरों व सैनिकों ने रेजीडेंसी में शरण ली। हमले की सूचना के बाद सर हेनरी लारेंस ने लखनऊ में हमला करने के लिए 600 सैनिकों की टोली कानपुर से रवाना की।

लेकिन क्रांतिकारियों के आगे ब्रिटिश सेना टिक नहीं सकी। कुछ मौके पर मारे गए, बाकी रेजीडेंसी पहुंच गए। क्रांतिकारियों के हमले से परेशान ब्रिटिश सेना ने रेजीडेंसी के चारो तरफ सुरक्षा घेरा बनाकर खुद को सुरक्षित करने की कोशिश की।

यहां 3000 लोग तीन माह तक नजरबंद रहे। बाहर से क्रांतिकारी अक्सर रेजीडेंसी के मुख्य द्वार पर अक्सर हमले करते थे। तीन मंजिला इमारत के अवशेष पर गोला बारूद के निशान अब भी मौजूद हैं।

बच्चों में दिखा इमारतों का कौतूहल
इतिहासकार रवि भट्ट से बच्चों ने इमारत के संबंध में खूब प्रश्न किए। किसी ने पूछा यह कितनी बड़ी थी? तो किसी ने कहा कि इतने बड़े में कितने लोग रहते थे? तहखाना क्या होता है?

इमामबाड़ा और दावतखाना की इमारत में बनें स्थानों के बारे में भी बच्चे जानने को उत्सुक दिखे। क्लॉक टॉवर, बेली गार्ड जहां अंग्रेजों की सुरक्षा गारद रहती थी।

जो समीप बनाए गए कोषागार और आयुध भंडार रखा जाता था। पोस्ट ऑफिस भवन के बाद फेयरी हाउस जो बड़े दायरे में बना हुआ दिखाई देता है। यहां अंग्रेजों के बच्चों को पढ़ाने वाली स्कूल मिस्ट्रेस मिसेज सागो रहती थी। इसलिए इस भवन को सागो हाउस भी कहा जाता है।

इमारत बताती हैं बुलंद इतिहास
नवाब नसीरुद्दीन हैदर ने अपनी बेगम मुकद्दरे अलिया के लिए कोठी बनवाई थी उसका नाम बेगम वाली कोठी पड़ गया। यहां के तहखाने में महिलाओं व बच्चों को नजर बंद कर रखा गया था।

इसके बगल में बेगम का इमामबाड़ा और मस्जिद है। जहां आमतौर पर किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। इसके आगे काफी क्षेत्रफल में भवन दावत खाना इमारत के खंडहर बताते हैं यह इमारत कभी बुलंद थी।

यहां ब्रिटिश सेना के खानपान का प्रबंध रहता था। क्रांति के दौरान इस भवन में अस्पताल भी बनाया गया था। हर इमारत के अवशेष में भव्य रहन-सहन की झलक साफ दिखाई देती है।

रेजीडेंसी के मुख्य भवन में बहुत बड़ा तहखाना बना है। जहां भीषण गर्मी के दिनों में लोग रहा करते थे। प्राचीन इमारतों को देख कॉलेज के बच्चों की उत्सुकता बढ़ती ही गई।


ऐसा लग रहा था कि हेरिटेज इमारतों को पास से देखकर वह सब कुछ जान लेना चाहते हों। ग्रुप कैप्टन वैभव ने कहा बुक्स में तस्वीरों में जो देखा था, उसे सामने देखकर बहुच रोमांच पैदा हुआ।

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