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जानिए, डीयू विवाद पर क्या बोले पीयू के दिग्गज?

Tue, 24 Jun 2014 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 24 Jun 2014 12:15 AM IST
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Here, DU controversy reactions of pu seniors

दिल्ली यूनिवर्सिटी(डीयू) में चार वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स का विवाद लगातार बढ़ रहा है। ट्राइसिटी से भी काफी स्टूडेंट डीयू से ग्रेजुएशन की डिग्री करने की मंशा रखते हैं। लेकिन, इस विवाद ने सैकड़ों स्टूडेंट्स को फिर से डीयू में दाखिले को लेकर चिंता में डाल दिया है। पीयू में अभी तीन वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स के अलावा पांच वर्षीय आनर्स कोर्स शामिल हैं।

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जिसके तहत 12वीं के बाद 3 साल की ग्रेजुएशन और 2 साल की मास्टर डिग्री कराई जाती है। पीयू के साइंस आनर्स स्कूल और आर्ट्स में इकोनॉमिक्स विभाग में यह सुविधा है। इस साल ट्राइसिटी से 12वीं में अच्छे अंक पाने वाले स्टूडेंट पीयू में ही दाखिले को प्राथकिता देंगे।
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बेवजह तूल दिया जा रहा

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पीयू के पूर्व कुलपति और सीनेट प्रो.आरपी भांभा कहते हैं कि मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। यूनिवर्सिटी को 3 और 4 दोनों ग्रेजुएट कोर्स का विकल्प देकर मामले को खत्म करना चाहिए। वह कहते हैं कि 3 वर्षीय ग्रेजुएशन डिग्री को इंटरनेशनल स्तर पर मान्यता प्रप्ता नहीं है। उन्होंने बताया कि 1980 से पहले पीयू में 15 और 16 साल में ग्रेजुएशन का विकल्प थे।

कोर्स चुनने में स्टूडेंट की मर्जी होती थी। पीयू डीन रिसर्च प्रो.ललित बंसल ने कहा कि यूजीसी द्वारा डीयू में 4 वर्षीय कोर्स को बंद करने के फरमान किसी भी यूनिवर्सिटी की ऑटोनॉमी में दखल देना है। उन्होंने कहा कि चार वर्षीय कोर्स करना एक तरह से वैल्यू एडिशन ही है। पीयू कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन प्रो. परविंदर सिंह ने कहा कि सिर्फ एक यूनिवर्सिटी में चार वर्षीय ग्रेजुएशन डिग्री के हक में नहीं है। इससे डीयू या अन्य यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स को माइग्रेशन में काफी दिक्कतें आती हैं। देश भर की सभी यूनिवर्सिटी और कालेज कैरिकुलम एक जैसा होना जरूरी है।

पीयू शुरू करेगा 7 वर्षीय च्वॉयस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम

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पीयू प्रशासन पिछले एक साल से पढ़ाई में इंटरनेशनल स्तर का च्वायस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम शुरू करने का प्रपोजल तैयार कर रहा है। इसके तहत साइंस के स्टूडें्स आर्ट्स के विषय भी ले सकेंगे। पीयू ने 7 वर्षीय इंटीग्रेटिड कोर्स की प्लानिंग की है।

इसके तहत स्टूडेंट पीयू में 12वीं में दाखिले के बाद पीएचडी की डिग्री लेकर ही निकलेगा। नए सिस्टम से विद्यार्थियों को एक फील्ड में माहिर बनाने में मदद मिलेगी।

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