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नाजुक कंधों पर है बस्ते का पहाड़ों जैसा बोझ
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 09 Jul 2014 09:47 AM IST
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छह से सात साल की उम्र के बच्चे का बैग का वजन अधिकतम दो किलोग्राम होना चाहिए लेकिन कक्षा एक-दो में पढ़ने वाले बच्चों के बैग का भार छह से सात किलो होता है।
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यह उनके शरीर और मन दोनों के लिए नुकसान दायक है। चौथी में पढ़ने वाली शिवी का बैग का वजन छह किलो है।
केंद्रीय विद्यालय संगठन की ओर से निर्धारित वजन से यह दो गुना ज्यादा है। लेकिन मनमर्जी करने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई न होने से इनके हौसले बुलंद हैं।
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12 वर्षीय बच्चों के बैग का अधिकतम वजन छह किलोग्राम होना चाहिए लेकिन यह 10 किलोग्राम तक होता है। स्थित एक स्कूल में एनसीईआरटी की किताबों के साथ ही रेफरेंस बुक्स लाना अनिवार्य है।
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ऐसे में कक्षा आठ के बच्चे के स्कूल बैग का भार बढ़कर आठ से 10 किलोग्राम हो जाता है। इतना भारी बैग लाने में बच्चों को मुसीबत होती है पर स्कूल का फरमान है इसलिए मजबूरी है।
निजी स्कूलों की आपसी प्रतिस्पर्धा और किताबों के कमीशन ने बच्चों की कोमल काया और मन दोनों पर ही भारी बोझ डाला है।
छोट-छोटे बच्चों को अपने वजन से ज्यादा, कई किलोग्राम भार का बैग उठाना पड़ता है। बच्चों की इस शारीरिक और मानसिक समस्या का समाधान करने वाला कोई नहीं।
नियम तो हैं पर स्कूलों की निगरानी कौन करे। सरकार ने भी निजी स्कूलों की मनमानी पर आंखें मूंद रखी हैं और बच्चों को बस्तों के भारी बोझ के साथ ही पढ़ाई करनी पड़ रही है।
प्राइवेट स्कूलों में आपसी कॉम्पिटीशन का आलम यह है कि स्कूलों ने कई तरह की बुक्स जारी कर रखी हैं।
सीबीएसई ने सीसीई और ओपन टेक्सट बुक जैसी व्यवस्था लागू कर बच्चों पर किताबों का बोझ कम करने की पहल की है। लेकिन निजी स्कूल मनमानी कर बच्चों पर किताबों का भार बढ़ा रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कम उम्र में ज्यादा भार उठाने से बच्चों को कई गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। इसी तरह पढ़ाई के प्रेशर की वजह से बच्चों का शारीरिक और मानसिक दोनों विकास बाधित हो रहा है।
बच्चों पर ज्यादा बोझ न पड़े इसके लिए केंद्रीय विद्यालय संगठन ने तो बकायदा स्कूली बैग का अधिकतम भार भी तय कर दिया है।
संगठन की ओर से सीबीएसई को भी इस संबंध में पत्र भेजा गया था, जिस पर सीबीएसई ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए व्यवस्था को ट्रायल बेस पर लागू करने की बात कही है।
इस सबके बावजूद निजी स्कूल संचालकों की मनमानी के कारण बच्चों को भारी-भारी बस्ते उठाने पर मजबूर होना पड़
रहा है।
भार बढ़ने की मुख्य वजह रेफरेंस बुक्स का कमीशन
बच्चों के स्कूल बैग का भार बढ़ने के पीछे मुख्य वजह किताबों में मिलने वाला कमीशन है। निजी स्कूल संचालक अपने कमीशन को देखते हुए विभिन्न प्रकाशनों की रेफरेंस बुक्स चलाने का फरमान जारी कर देते हैं।
प्रकाशकों को भी बाजार में बिक रही बाकी किताबों के मुकाबले अपनी बुक्स की कीमत को जायज ठहराना होता है। इसलिए जानबूझकर किताब में बहुत सी अनावश्यक चीजें डाल दी जाती हैं।