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सात साल से लापता है स्कूल की हेडमास्टर

Sun, 19 Oct 2014 03:55 PM IST
Updated Sun, 19 Oct 2014 03:55 PM IST
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headmaster missing since seven years.

शिक्षकों के महीने, दो महीने स्कूल से गायब रहने की खबरें तो पहले भी सुनी-पढ़ी होंगी। लेकिन उत्तराखंड का एक स्कूल ऐसा भी है, जहां के छात्रों ने सात साल से अपनी प्रधानाध्यापिका की शक्ल नहीं देखी है।

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ऋषिकेश के वीरभद्र स्थित यह स्कूल है बाल भारती मांटेसरी जूनियर हाईस्कूल। इस अशासकीय स्कूल के शिक्षकों का वेतन शिक्षा विभाग जारी करता है, लेकिन इस पर विभाग का कोई नियंत्रण नहीं रह गया है। हेडमास्टर के अलावा यहां तैनात शिक्षक भी मनमर्जी से स्कूल आते हैं।
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मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी खाली के औचक निरीक्षण में यह खुलासा हुआ। सीईओ ने चार अक्तूबर को शिक्षा महानिदेशक को भेजी रिपोर्ट में कहा कि 25 सितंबर को उन्होंने स्कूल का औचक निरीक्षण किया।
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इसमें पाया गया कि स्कूल की प्रधानाध्यापिका योगिता गुप्ता स्कूल से लगातार अनुपस्थित चल रही हैं, जबकि उपस्थिति पंजिका में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए जा रहे हैं।

बीस साल बाद हुआ निरीक्षण

headmaster missing since seven years.

स्कूल में शिक्षकों की इस मनमानी के पीछे शिक्षा विभाग की लापरवाही भी बड़ी वजह रही है। बीस साल में यहां सिर्फ दो अधिकारियों ने निरीक्षण किया है।

बीस साल पहले तत्कालीन जिला शिक्षाधिकारी और वर्तमान शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने यहां निरीक्षण किया था। अब मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी खाली स्कूल में पहुंचे।

बच्चे बोले, नहीं देखी कभी प्रधानाध्यापिका
सीईओ एसपी खाली ने निरीक्षण के दौरान कक्षा सात में पढ़ रहे बच्चो से बातचीत की। स्कूल में उस दिन 14 में से 11 बच्चे उपस्थित थे।

इन बच्चों ने बताया कि वे कक्षा एक से इसी स्कूल के छात्र रहे हैं, लेकिन इनमें से सभी ने कहा कि सात साल में उन्होंने एक बार भी अपनी प्रधानाध्यापिका को नहीं देखा है।

शिक्षक भी नदारद

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सीईओ की रिपोर्ट के अनुसार निरीक्षण के दिन स्कूल के सहायक अध्यापक भी अनुपस्थित मिले। उपस्थिति लिपिक ने शिक्षक का अवकाश प्रार्थनापत्र दिखाया, लेकिन इसे न प्रबंधक ने स्वीकृत किया था न ही प्रधानाध्यापिका ने।

रिपोर्ट में सीईओ ने लिखा है कि स्कूल नियंत्रणविहीन हो चुका है और वहां अवकाश स्वीकृत करने, अंकन करने की परिपाटी नहीं है।

खाना भी ठीक नहीं मिलता
रिपोर्ट के अनुसार बच्चों ने सीईओ को बताया कि मिड डे मील की गुणवत्ता काफी खराब रहती है। चावल से बदबू आती है, जबकि दाल के नाम पर सिर्फ पानी मिलता है।

लंबे समय से अनुपस्थित रहने के बावजूद प्रधानाध्यापिका स्कूल से हर माह वेतन निकाल रही हैं। स्कूल में कई अन्य कर्मी भी अनुपस्थित मिले। खंड शिक्षाधिकारी डोईवाला को स्कूल के सभी अभिलेख सील कर मामले की जांच का आदेश दे दिया गया है।
- एसपी खाली, मुख्य शिक्षा अधिकारी

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