15 हजार सरकारी शिक्षकों की नौकरी खतरे में
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हरियाणा स्कूल शिक्षक भर्ती बोर्ड को खारिज करने के बाद प्रदेश सरकार ने बोर्ड के ऐसे अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की तैयारी कर रही है, जिन्होंने फर्जी तरीके से भर्ती की है। सरकार के इस फैसले से अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही करीब 15 हजार शिक्षकों के भविष्य पर भी तलवार लटक गई है।
यहां पत्रकारों से बातचीत में प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने कहा कि शिक्षक भर्ती बोर्ड ने जिन शिक्षकों की नियुक्ति की थी, उनकी भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां पाई गई हैं।
उन्होंने कहा कि जब दस्तावेजों की जांच शुरू की गई तो उसमें हाथ की जगह पैर के अंगूठों के निशान पाए गए। जिन संस्थाओं की डिग्रियां पेश की गईं, वह वजूद में नहीं मिलीं।
अनुभव प्रमाण पत्र जो प्रस्तुत किए गए, जांच के दौरान उस नाम की कोई संस्था ही नहीं मिली। जहां कहीं कुछ संस्थाएं मिलीं तो वहां कहा गया कि इस नाम के किसी भी व्यक्ति ने यहां काम नहीं किया।
उन्होंने कहा कि अध्यापक भर्ती बोर्ड में बड़े पैमाने पर धांधली मिली है, इसलिए हरियाणा सरकार ने अध्यापक भर्ती बोर्ड को निरस्त कर दिया है। शिक्षामंत्री ने कहा कि दस्तावेज में अनियमितताएं पाए जाने पर आपराधिक मामला दर्ज करने के लिए सरकार विचार कर रही है।
कर्मचारी चयन आयोग से ही होगी भर्ती
शिक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य में होने वाली शिक्षकों की सभी भर्तियां कर्मचारी चयन आयोग के द्वारा की जाएगी। सरकार जल्द ही भारी संख्या में अध्यापकों की भर्ती करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की नीति है कि यह भर्तियां पारदर्शी और मेरिट के आधार पर होंगी।
बोर्ड में थे सीएम के सगे-संबंधी : शर्मा
शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान परिवारवाद को बढ़ावा दिया गया। अध्यापक भर्ती बोर्ड को ऐसा बना दिया गया, जिसमें मुख्यमंत्री व उनके मंत्रिमंडल सदस्यों के सगे संबंधी शामिल थे। उन लोगों ने ऐसी सिफारिशें की जिन्हें बताते हुए भी उन्हें संकोच हो रहा है।