नौकरी के लिए IBM को मनाएंगे उत्तराखंड के CM
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डीएवी पीजी कॉलेज में छात्रसंघ अध्यक्ष की गुंडई के बाद वापस लौटी आईबीएम कंपनी को मुख्यमंत्री हरीश रावत वापस बुलाएंगे।
गुरुवार को मामले की जानकारी मिलने के बाद सीएम कार्यालय ने फोन कर प्राचार्य से कंपनी के अधिकारियों के नंबर लिए। उम्मीद है जल्द ही कंपनी दोबारा कॉलेज में प्लेसमेंट कैंप लगाएगी।
कॉलेज में बुधवार को आईबीएम इंडिया कंपनी ने ग्रेजुएशन पास कर चुके छात्रों के लिए कैंपस प्लेसमेंट कैंप लगाया था। चयनित छात्रों को सालाना 2.60 लाख के पैकेज मिलना था।
कैंप शुरू हुआ ही था कि छात्रसंघ अध्यक्ष पारस गोयल ने बाहरी छात्रों को प्रक्रिया में शामिल करने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। उन्होंने सभी शिक्षकों, छात्रों के अलावा कंपनी के अधिकारियों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया। इसके बाद कंपनी के नुमाइंदे लौट गए।
गुरुवार को मीडिया से जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री ने कंपनी को दोबारा वापस बुलाने की इच्छा जताई। सीएम ने प्रकरण पर अफसोस प्रकट किया। उन्होंने कहा कि कंपनी के अधिकारियों से बात कर कॉलेज में दोबारा कैंप लगाया जाएगा, ताकि युवाओं को मल्टीनेशनल कंपनी में रोजगार का मौका मिल सके।
अध्यक्ष की करतूत पर एबीवीपी में दो फाड़
डीएवी कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष की वजह से छात्रों के बीच हुई बदनामी ने एबीवीपी को दो हिस्सों में बांट दिया है। एक गुट तो अध्यक्ष का बचाव कर रहा है, जबकि दूसरे गुट इस घटना से नाराज है। नाराज गुट ने संगठन मंत्री से मसले पर बैठक बुलाने की मांग की है।
छात्रसंघ अध्यक्ष के हंगामे की वजह से नौकरी से वंचित रह गए छात्रों ने जबर्दस्त विरोध जताया था। छात्रों ने कहा था कि उन्होंने वोट देकर अपने लिए लीडर चुना था, रूलर नहीं।
मामले में संगठन दो हिस्सों में बंट गया। मामले में एबीवीपी के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव छात्रसंघ अध्यक्ष का बचाव करते नजर आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि कैंपस प्लेसमेंट के संबंध में न तो शिक्षकों को सही सूचना थी और न ही छात्रों को। उन्होंने कहा कि कंपनी की शैक्षिक योग्यता की डिमांड के मुताबिक कॉलेज के छात्र फिट भी नहीं बैठ रहे थे।
हालांकि, कालेज प्रशासन ने प्लेसमेंट के लिए करीब दो हजार छात्रों को एसएमएस से जानकारी भेजी थी। इस बात का वे जवाब नहीं दे पाए।
अब प्लेसमेंट अधिकारी को लिया निशाने पर
अपनी हरकत से विवादों में आए छात्रसंघ अध्यक्ष पारस गोयल ने अब कॉलेज के प्लेसमेंट अधिकारी को निशाने पर ले लिया है। पारस ने कॉलेज परिसर में आयोजित प्रेस वार्ता में प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. अजय सक्सेना पर आरोप लगाए कि उन्होंने कंपनी से पैसा खाया है।
हालांकि वह इसका कोई प्रमाण नहीं दिखा पाए। मामले में डॉ. सक्सेना का कहना है कि प्लेसमेंट प्रक्रिया किसी एक व्यक्ति के जिम्मे नहीं होती है। प्राचार्य की ओर से कंपनी का पत्र भेजा गया था। इस पर प्लेसमेंट सेल ने काम करके कंपनी को यहां बुलाया था।
उन्होंने कहा कि जो कंपनी छात्रों को रोजगार देगी, वह किसी भी अधिकारी को क्यों पैसे देगी। प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन ने भी गोयल के आरोप को खारिज कर दिया।