फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Hallmark Public School will Participate in international compitision

विदेशियों से मुकाबला करने को तैयार ये होनहार

Thu, 19 Dec 2013 01:27 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 19 Dec 2013 01:27 AM IST
विज्ञापन
Hallmark Public School will Participate in international compitision

प्राकृतिक आपदा और प्रकोप से बचाने के लिए सेक्टर-15 के हॉलमार्क पब्लिक स्कूल के विद्यार्थियों ने लीगो रोबोट्स तैयार किए हैं।

विज्ञापन


इसे तैयार करने के समय यह खास ध्यान रखा गया कि प्रॉपर्टी को कम से कम नुकसान पहुंचे, क्योंकि इस प्रोजेक्ट का नाम ही ‘नेचर्स यूरी’ है।

विद्यार्थियों का यह समूह प्रतिभा प्रदर्शन के फर्स्ट लीगो लीग (एफएलएल) नामक रोबोटिक मुकाबले में दुनिया के 70 देशों के प्रतिभागियों से मुकाबला करने की तैयारियों में जुटा है।

यह मुकाबला मैनचेस्टर स्थित इंटरनेशनल एसटीईएम (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व मैथ) नामक प्रोग्राम का हिस्सा है।

हर साल की तरह इस प्रतियोगिता के लिए इस साल चुनौती है ‘प्रकृति का प्रकोप’।

रोबोटिक्स का इस्तेमाल करते हुए इसमें विद्यार्थियों को निर्धारित रिहायशी इलाके में 10 कार्यों को सफलतापूर्वक अंजाम देना होगा, जिसे पहले लीगो ब्लॉक्स का इस्तेमाल करते हुए पूरा करना है। इसकी हर गतिविधि को 2.5 मिनट में पूरा करना होगा।
विज्ञापन


प्रोजेक्ट से वाकिफ कराने को वर्कशॉप

हॉलमार्क स्कूल की टीम में अवनी राणा, रश्मि, अवि गोयल, युवराज सिंघल, प्रकाश गुप्ता, जतिन छाबड़ा, मेघना शर्मा, कार्तिकेय मेहता, पंखुड़ी गर्ग, स्नेहिल शर्मा और सारंग कलसी शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


सभी स्टूडेंट्स पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के हैं। इन विद्यार्थियों को ऐसे प्रोजेक्ट से वाकिफ कराने के उद्देश्य से रियल टाइम ‘रोबोटिक वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया।

स्नेहिल और पंखुड़ी ने बताया कि उसकी टीम ने एक विशेष कुदरती आपदा पर ध्यान केंद्रित किया और आपदा के बीच घिरे बाशिंदों की कठिनाइयों का हल सुझाने के लिए रियल वर्ल्ड सॉल्यूशन पर काम किया।

उन्होंने असल रोबोट में प्री-प्रोग्रामिंग की चुनौतियों पर पार करने में कामयाबी हासिल की है’। वहीं, कार्तिकेय और प्रखर ने बताया कि सबसे मुश्किल काम रोबोट को काम में लगाना था।


इसके लिए उन्होंने पहले रोबोट के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग के बारे में सीखा और बाद में इसकी प्री-प्रोग्रामिंग करने में वे कामयाब हुए।

डायरेक्टर जिवतेश गर्ग ने बताया कि स्कूल इस लीग में हिस्सा लेने जा रहा है और वह इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी संबंधी मुकाबले में 70 देशों से आने वाले प्रतिभागियों से मुकाबला करेगा। अगले वर्ष अप्रैल में यह इंटरनेशनल मुकाबला होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed