{"_id":"9ff8a9a4163cd625a8a2835b03bc4985","slug":"ground-reality-of-schools-in-lucknow-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षकों की मनमानी जारी, पर प्रशासन खामोश","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
शिक्षकों की मनमानी जारी, पर प्रशासन खामोश
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 21 Aug 2014 12:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केस 1- नेशनल इंटर कॉलेज के शिक्षक ने ट्यूशन न पढ़ने पर 100 से ज्यादा स्टूडेंट्स को फेल कर दिया। जुलाई में स्कूल खुलने पर स्टूडेंट्स ने हंगामा कर दिया। मामला डीआईओएस के पास पहुंचा तो उन्होंने दोबारा कॉपी जांचने के आदेश दिए। दोबारा कॉपी जांचने पर 60 बच्चे पास हो गए। शिक्षक पर लगा आरोप साबित हो गया पर उसके खिलाफ शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की।
विज्ञापन
केस 2- राजकीय निशातगंज इंटर कॉलेज में शिक्षक कत्येंद्र पाल ने संतोष शर्मा नाम के स्टूडेंट्स को बुरी तरह से पीटा। इससे स्टूडेंट्स के कान, पेट और पैर में काफी चोटें आईं। इस मामले में शिक्षक के खिलाफ महानगर कोतवाली में एफआईआर भी दर्ज हो गई। इसके बावजूद किसी शिक्षा अधिकारी ने घटना का संज्ञान नहीं लिया।
विज्ञापन
केस 3- जुलाई में गुरुकुल एकेडमी में अभिभावकों ने बढ़ी फीस का विरोध किया तो उनके बच्चों के नाम बीच सत्र में काट दिए गए। अभिभावकों ने जिला अधिकारी के पास शिकायत की। डीएम ने डीआईओएस को जांच करके कार्रवाई के लिए कहा पर अभी तक न तो डीआईओएस जांच करने स्कूल पहुंचे और ना ही बच्चों का नाम दोबारा लिखे गए। अभिभावक परेशान होकर इधर-उधर घूम रहे हैं।
विज्ञापन
ये तीन मामले तो बानगी भर हैं, शिक्षा व्यवस्था का हाल बताने के लिए। शिक्षकों की मनमानी से स्टूडेंट्स और अभिभावकों का बुरा हाल है। शिक्षा विभाग तक शिकायतें भी जाती हैं पर कार्रवाई नहीं की जाती।
इस कारण स्कूलों और शिक्षकों की मनमानी बढ़ती जा रही है। वहीं, सबसे ज्यादा परेशानी पैरेंट्स और स्टूडेंट्स को भुगतनी पड़ रही हैं।
राजधानी में निजी और सरकारी दोनों ही विद्यालयों पर शिक्षा विभाग का कोई जोर नहीं है। स्कूल अपने हिसाब से बनाए कानून पर ही चल रहे हैं।
सरकार की ओर से शिक्षकों के ट्यूशन पढ़ाने पर साफ मनाही है। ऐसा करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई के आदेश हैं। इसके बावजूद नेशनल इंटर कॉलेज में कॉमर्स के शिक्षक ने बच्चों को ट्यूशन न पढ़ने पर फेल कर दिया।
स्टूडेंट्स ने हंगामा किया तो दोबारा कॉपी जांची गई। आरोपों की पुष्टि होने के बाद भी अब तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई।इसी तरह स्कूलों में स्टूडेंट्स को शारीरिक दंड देने पर पूरी तरह से रोक है।
इसके बावजूद 14 अगस्त को राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज में शिक्षक कत्येंद्र पाल ने संतोष शर्मा नाम के स्टूडेंट्स की बुरी तरह से पिटाई कर दी गई।
इस मामले की नामजद रिपोर्ट महानगर कोतवाली में दर्ज हो चुकी है। पर शिक्षा विभाग अभी तक नहीं चेता है। इस मामले पर अभी तक शिक्षा विभाग की ओर से जांच तक नहीं की गई है।
इसी तरह गुुरुकुल एकेडमी में भी बीच सत्र बच्चों के नाम काटे जाने पर भी डीआईओएस स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में स्कूल की मनमानी के खिलाफ दूसरे अभिभावक बोलने से भी घबड़ा रहे हैं।
मान्यता बेचने के मामले का भी नहीं लिया संज्ञान
बोर्ड के नियमों के अनुसार बिना शिक्षा विभाग की अनुमति के विद्यालय का स्थान भी नहीं बदला जा सकता। यूपी बोर्ड से संबद्ध फ्यूचर फाउंडेशन इंटर कॉलेज इस समय बालागंज में गोशाला रोड पर चल रहा है। यह विद्यालय वर्तमान स्थान से करीब दो किलोमीटर की दूरी पर चल रहा था।
सूत्रों के अनुसार विद्यालय प्रबंधक ने स्कूल की मान्यता का सौदा कर लिया था। इस वजह से ही स्कूल का स्थान बदला है।
मामला डीआईओएस के संज्ञान में आए एक महीने से ज्यादा हो चुका है। इसके बावजूद स्कूल का निरीक्षण नहीं किया गया है।