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अब उत्तराखंड में भी खुलेगा ग्रीन स्कूल
आफताब अजमत / अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 22 Jun 2015 10:53 AM IST
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देश दुनिया में अपने ग्रीन स्कूल कांसेप्ट से नाम कमाने के बाद अब विरेंद्र रावत अपने प्रदेश में भी यह हरित शुरुआत करने जा रहे हैं।
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इसके लिए प्रदेश के तीन स्कूलों का चयन किया गया है। इन स्कूलों को इसी अकादमिक सत्र से ग्रीन स्कूल में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। प्रदेश में पहली ग्रीन यूनिवर्सिटी की बुनियाद रखने के लिए जमीन तलाशने टिहरी आए विरेंद्र रावत इस दौरान अमर उजाला कार्यालय भी पहुंचे। उन्होंने ग्रीन एजूकेशन से जुड़े तमाम प्रोजेक्ट साझा किए।
मूलरूप से टिहरी गढ़वाल में प्रतापनगर ब्लॉक की उपली रमौली में हेरवाल गांव में जन्मे विरेंद्र रावत ने 2010 में अहमदाबाद में पहले ग्रीन स्कूल की स्थापना की। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को जब ग्रीन स्कूल के बारे में पता चला तो उन्होंने खुद इसका निरीक्षण किया।
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विरेंद्र को तत्काल प्रदेश में इस तरह के ग्रीन स्कूल के प्रोत्साहन के लिए सलाहकार नियुक्त कर लिया। सीबीएसई के दस से अधिक संबद्ध ग्रीन स्कूलों के संचालक होने के साथ ही 100 से अधिक ग्रीन स्कूलों की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे विरेंद्र शनिवार को अमर उजाला कार्यालय पहुंचे।
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उन्होंने बताया कि वह अब देहरादून, ऋषिकेश और टिहरी के तीन स्कूलों को ग्रीन स्कूल में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर काम शुरू करने जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि देहरादून में गढ़ी कैंट स्थित गेवे स्कूल, ऋषिकेश में टीएचडीसी कालोनी के स्कूल के परिवर्तन की बात तय हो चुकी है, जबकि टिहरी के एक स्कूल से अभी बातचीत चल रही है।
प्रदेश में ग्रीन यूनिवर्सिटी बनाने पर काम
विरेंद्र रावत के मुताबिक अब वह प्रदेश में ग्रीन यूनिवर्सिटी की स्थापना पर काम कर रहे हैं। प्रदेश सरकार भी उनके इस ग्रीन एजुकेशन प्रोजेक्ट से प्रभावित है। सरकार ने इसके लिए उनसे प्रस्ताव मांगा है। वह टिहरी के ओखलाखाल, ठाला और प्रतापनगर में इसके लिए जमीन देखकर आए हैं।
जैसे ही जमीन तय हो जाएगी तो वह सरकार को प्रस्ताव भेज देंगे। उनका मकसद प्रदेश से पलायन को रोकना है। वह इस विवि में जो कोर्स चलाएंगे, वह पर्यावरणीय रंग में रंगे होंगे। वह छात्रों के भीतर कार्बन- उद्यमिता का विकास करना चाहते हैं। यहां से पासआउट छात्र जहां भी जाएंगे, पर्यावरण का झंडा बुलंद करेंगे।
यह है ग्रीन प्रोजेक्ट
विरेंद्र रावत ने बताया कि ग्रीन स्कूल एक सोच है, जिसमें छात्रों को आधारभूत तत्व जल, गगन, वायु, अग्नि और पृथ्वी तत्व उपलब्ध कराया जाता है। इन पांचों तत्वों के बारे में छात्रों को गहनता से बताया जाता है।
ग्रीन स्कूल में हर छात्र कम से कम एक पेड़ लगाता है। इन स्कूलों में बच्चों के खेल भी पर्यावरण वाले ही होते हैं। व्यर्थ की चीजों को रिसाइकिल कर प्रयोग में लाना सिखाया जाता है। उनका कहना है कि यहां पढ़ने वाला छात्र कभी बीमार नहीं पड़ता।