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जल्द लगेंगे सीबीएसई की स्कूल बसों में जीपीएस
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 08 Jan 2014 09:13 AM IST
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स्कूली बसों को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए सीबीएसई ने अपने स्कूलों को
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इनमें ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) लगवाने को निर्देशित किया है।
बोर्ड के अनुसार, इससे बसों की लोकेशन ट्रैक करना आसान होगा और बच्चों का स्कूल आना-जाना ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
वहीं, नई गाइडलाइंस पर स्कूलों का कहना है कि यह निश्चित तौर पर अच्छा कदम होगा, लेकिन सभी स्कूलों को इसे फॉलो करवाना मुश्किल हो सकता है।
बोर्ड ने इन जीपीएस डिवाइस को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) से मान्यता प्राप्त होने की शर्त रखी है। साथ ही बोर्ड ने स्कूलों से उनकी वार्षिक सुरक्षा यातायात व्यवस्था को ट्रैफिक पुलिस से अप्रूव करवाके भिजवाने के लिए भी कहा है।
इससे पहले भी सीबीएसई स्कूलों को निर्देश दे चुका है कि वे अपनी बसों में स्पीड निगरानी उपकरण लगवाएं, लेकिन अधिकतर स्कूलों ने इसे नहीं लगवाया।
बोर्ड के लखनऊ समन्वयक जावेद आलम बताते हैं कि जीपीएस लगीं बसें अभिभावकों में एक सेंस ऑफ सेक्योरिटी विकसित करेंगी।
वहीं, जानकार कहते हैं कि 8 से 12 हजार रुपये की जीपीएस डिवाइस बसों में लगाना स्कूलों के लिए कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जरूरी है कि इसका भी खर्च अभिभावकों से न वसूला जाए, क्योंकि ये उपकरण बसों में स्कूलों को स्वाभाविक तौर पर लगवाने चाहिए।
जीपीएस से फायदा
जीपीएस दरअसल सैटेलाइट से जुड़कर तैयार होने वाला एक नेटवर्क है जो जीपीएस डिवाइस पर लगे उपकरण से प्राप्त संकेतों के आधार पर धरती पर उसकी स्थिति बताता है।
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यानी स्कूल में ही बैठे-बैठे स्टाफ यह जानकारी रख सकेगा कि बस कहां है। ऐसे में उसके कहीं फंसने, हादसे की शिकार होने या खराब होकर रुकने की लोकेशन आसानी से पता लगाई जा सकेगी।
इससे अभिभावक भी स्कूल के जरिए बस की लोकेशन जान सकेंगे।
बोर्ड के अनुसार, इससे बसों की लोकेशन ट्रैक करना आसान होगा और बच्चों का स्कूल आना-जाना ज्यादा सुरक्षित बनाया जा सकेगा।
वहीं, नई गाइडलाइंस पर स्कूलों का कहना है कि यह निश्चित तौर पर अच्छा कदम होगा, लेकिन सभी स्कूलों को इसे फॉलो करवाना मुश्किल हो सकता है।
बोर्ड ने इन जीपीएस डिवाइस को ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एआरएआई) से मान्यता प्राप्त होने की शर्त रखी है। साथ ही बोर्ड ने स्कूलों से उनकी वार्षिक सुरक्षा यातायात व्यवस्था को ट्रैफिक पुलिस से अप्रूव करवाके भिजवाने के लिए भी कहा है।
इससे पहले भी सीबीएसई स्कूलों को निर्देश दे चुका है कि वे अपनी बसों में स्पीड निगरानी उपकरण लगवाएं, लेकिन अधिकतर स्कूलों ने इसे नहीं लगवाया।
बोर्ड के लखनऊ समन्वयक जावेद आलम बताते हैं कि जीपीएस लगीं बसें अभिभावकों में एक सेंस ऑफ सेक्योरिटी विकसित करेंगी।
वहीं, जानकार कहते हैं कि 8 से 12 हजार रुपये की जीपीएस डिवाइस बसों में लगाना स्कूलों के लिए कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन जरूरी है कि इसका भी खर्च अभिभावकों से न वसूला जाए, क्योंकि ये उपकरण बसों में स्कूलों को स्वाभाविक तौर पर लगवाने चाहिए।
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जीपीएस से फायदा
जीपीएस दरअसल सैटेलाइट से जुड़कर तैयार होने वाला एक नेटवर्क है जो जीपीएस डिवाइस पर लगे उपकरण से प्राप्त संकेतों के आधार पर धरती पर उसकी स्थिति बताता है।
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यानी स्कूल में ही बैठे-बैठे स्टाफ यह जानकारी रख सकेगा कि बस कहां है। ऐसे में उसके कहीं फंसने, हादसे की शिकार होने या खराब होकर रुकने की लोकेशन आसानी से पता लगाई जा सकेगी।
इससे अभिभावक भी स्कूल के जरिए बस की लोकेशन जान सकेंगे।