छात्रवृति से जुड़ी एक बड़ी खुशखबरी, लाखों स्टूडेंट्स को मिलेगा फायदा
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सूबे में अनुसूचित जाति और जनजाति का कोई भी छात्र शुल्क की भरपाई और छात्रवृत्ति से वंचित नहीं रहेगा, बशर्ते उसने सभी प्रमाणपत्र सही लगाए हों। इसकी वजह है आवेदकों की संख्या को देखते हुए समाज कल्याण विभाग के पास कहीं ज्यादा बजट का होना।
उधर, राष्ट्रीय सूचना-विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने इस सत्र में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत आवेदन करने वाले छात्रों के प्रमाणपत्रों की जांच शुरू कर दी है, जो कि 25 नवंबर तक पूरी होगी।
सत्र 2015-16 में छात्रवृत्ति पाने के लिए कक्षा 10 व 11 के एक लाख 68 हजार 172 एससी-एसटी छात्रों ने आवेदन किया है। कक्षा-12 से ऊपर इन छात्रों की संख्या 8 लाख 98 हजार 979 है।
यानी, दशमोत्तर कक्षाओं में एससी-एसटी वर्ग के कुल 10 लाख 67 हजार 151 छात्रों ने आवेदन किया है। पिछले साल यह संख्या 15 लाख से ऊपर थी। समाज कल्याण विभाग का कहना है कि इन छात्रों को शुल्क की भरपाई के साथ छात्रवृत्ति बांटने के लिए उनके पास 2200 करोड़ रुपये का बजट है।
छात्रों के लिए चाहिए एक हजार करोड़ का बजट
इस बार छात्र संख्या को देखते हुए बमुश्किल एक हजार करोड़ रुपये की जरूरत होगी। मतलब, सभी छात्रों को योजना का लाभ देने के बाद भी बजट बचेगा। उधर, सोमवार को प्रमुख सचिव सुनील कुमार ने आवेदकों की स्क्रूटनी के बाबत समीक्षा बैठक की।
उन्होंने एनआईसी को 31 बिंदुओं के आधार पर स्क्रटूनी के निर्देश दिए, ताकि एक भी फर्जी छात्र राशि न ले सके। इस काम के लिए समाज कल्याण विभाग और एनआईसी के अफसरों की संयुक्त टीम बनाई गई है।
पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) के माध्यम से छात्रों के खातों की भी जांच कराई जाएगी, ताकि कहीं कोई खामी होने पर इन्हें समय रहते दुरुस्त करा लिया जाए।