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उपराष्ट्रपति बोले, युवा उच्च शिक्षा पर दें ध्यान
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 10 Jan 2014 09:10 AM IST
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उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि देश में उच्च शिक्षा की सुलभता और गुणवत्ता आने वाले समय की बड़ी चुनौतियां है। 2020 तक उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के दावेदारों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।
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इस युवा शक्ति के लिए उच्च शिक्षा के विकास पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में अनुसंधान की उपेक्षा और उच्च शिक्षा में तकनीक के कम इस्तेमाल पर भी चिंता जताई।
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हामिद अंसारी बृहस्पतिवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के 56वें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे। मौके पर जाने-माने वैज्ञानिक पद्म विभूषण डॉ. आरए माशेलकर को डॉक्टर ऑफ साईंस (डीएसएसी) की उपाधि प्रदान की गई।
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि उच्च शिक्षा में चिंता के दो क्षेत्र हैं, बजट आवंटन और दूसरा अनुसंधान, प्रोत्साहन एवं परिणाम। देश में उच्च शिक्षा पर जीडीपी का मात्र 1.2 फीसदी खर्च होता है।
यह ब्राजील व चीन जैसे विकासशील देशों से बेहद कम है। हमारे विश्वविद्यालयों में अनुसंधान एवं शिक्षण का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों से कमतर है।
यही वजह है कि किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय को दुनिया की टॉप-200 संस्थाओं में स्थान नहीं मिला। यह भी चिंताजनक है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में नामांकन कराने वाले केवल एक फीसदी छात्र ही अनुसंधान कर पाते हैं। 2010 में पेटेंट आवेदनों में भारतीयों के केवल 0.3 फीसदी आवेदन थे।
उन्होंने कहा, हाल के वर्षों में निजी क्षेत्र के प्रयासों से उच्च शिक्षा का काफी विकास हुआ है। भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली दुनिया में तीसरे नंबर की है। देश में 652 विश्वविद्यालय, 33 हजार से ज्यादा महाविद्यालय हैं।
इनमें 2.75 करोड़ छात्र पढ़ रहे हैं, हालांकि यह विश्व के औसत से काफी कम है। देश भर में छात्रों के कुल नामांकन का 60 प्रतिशत निजी संस्थाओं में हो रहा है। कुछ निजी संस्थाओं का प्रदर्शन उत्कृष्ट है तो के निम्न स्तरीय हैं।
सबसे बड़ी चुनौती यही है कि 2020 में नामांकन के लिए पात्र छात्रों की संख्या दोगुनी होने पर उन्हें समान रूप से उच्च शिक्षा कैसे सुलभ कराया जाए, शिक्षा की गुणवत्ता को कैसे सुधारा जाए।
जनवरी 2013 में घोषित की गई नई विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन पॉलिसी में शोध और विकास का बजट जीडीपी के एक फीसदी से बढ़ाकर दो प्रतिशत करने, विश्व के वैज्ञानिक प्रकाशनों में देश की हिस्सेदारी को 3.5 फीसदी से बढ़ाकर सात प्रतिशत करने का लक्ष्य तय किया गया है।
सार्वजनिक, निजी क्षेत्र या सेल्फ फाइनेंस रिसर्च एवं इनोवेशन विश्वविद्यालयों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है।
सूचना व ज्ञान के बिना नहीं बढ़ सकते: जोशी
राज्यपाल बीएल जोशी ने कहा कि आज का समय सूचना और अर्थ प्रधान है। सूचना व ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है। सूचना तंत्र कंप्यूटर, इंटरनेट की अनदेखी कर आगे नहीं बढ़ सकते।
विश्वविद्यालय शिक्षा के केंद्र हैं, साक्षरता के नहीं। असामाजिक, अमानवीय आचरण करने वाले साक्षर हो सकते हैं, शिक्षित नहीं। उन्होंने डिग्री लेने वाले छात्रों को आत्मविश्वास और मानवीय चेतना का मूलमंत्र दिया।
उन्होंने छात्राओं द्वारा अधिकतर मेडल पाने को समाज में बड़े बदलाव का संकेत बताया।
नई सोच व शोध को दें बढ़ावा: अखिलेश
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालय दुनिया के स्तर पर पीछे दिखते हैं। उनमें शोध और नए ढंग से सोचने का अभाव है। विश्वविद्यालयों को इन्हें बढ़ाना देना चाहिए।
लखनऊ व कानपुर में जितने बड़े संस्थान हैं, उतने कम ही शहरों में मिलेंगे। इनमें इनोवेशन और रिसर्च का प्लेटफार्म तैयार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिग्री लेने वाले छात्रों के सामने चुनौतियां भी आएंगी।
उन्हें ऐसी ताकतों से भी मुकाबला करना होगा जो संविधान और कानून को धता बताती हैं। संविधान और कानून से ही देश चलता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं।