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दिल की सुनो और जीत लो सारा जहां

Sun, 12 Jan 2014 01:06 PM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 12 Jan 2014 01:06 PM IST
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‘जब हम पढ़ते थे तो दुनिया अलग थी। पढ़ने और पढ़ाने का तरीका अलग था, पर आज हालात बदल चुके हैं। आपके पास ज्ञान का अनंत सागर इंटरनेट है। सूचनाएं हैं और संपर्क करने के लिए वॉट्स एप जैसे जरिए हैं।

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पुरानी पीढ़ी शायद इन बदलावों को समझ न पाए, लेकिन इसके लिए उन पर झुंझलाइए नहीं। शिक्षकों का आदर करिए और बात सुनते रहिए लेकिन निर्णय अपने दिमाग से लीजिए।’
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प्रदेश के युवा इंजीनियर्स को यह सलाह दी प्रधानमंत्री के सलाहकार डॉ. सैम पित्रोदा ने। वे शनिवार को लखनऊ में आयोजित उ. प्र. प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के 11वें दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
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कार्यक्रम में 12 मेधावियों को गोल्ड व नौ स्टूडेंट्स को सिल्वर मेडल दिए गए। वहीं, 44 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि दी गई।

दीक्षांत समारोह के शुरू होते ही जैसे ही शैक्षिक यात्रा मंच पर पहुंची और मुख्य अतिथि सैम पित्रोदा ने हाथ हिलाकर अभिवादन किया, स्टूडेंट्स ने जोरदार तालियों के साथ खड़े होकर उनका इस्तकबाल किया।

अपने भाषण में सैम पित्रोदा ने भी युवाओं की भावनाओं का पूरा ख्याल रखते हुए गुरुमंत्र बेहद ही रोचक ढंग से दिया। डॉ. पित्रोदा ने कहा कि स्टूडेंट्स उपभोक्ता की तरह हैं।

वे बदल रहे हैं और जरूरतें भी बदल रही हैं, लेकिन शिक्षक इसे समझ नहीं पा रहे हैं। अंकल सैम ने कहा कि देश में सभी तक सस्ता और तेज गति वाला इंटरनेट पहुंचाने के लिए फाइबर नेटवर्क बिछाने की प्रक्रिया तेजी पर है।

विश्वविद्यालयों को इससे जोड़ा जा चुका है। अगले 18 महीनों में सभी ग्राम पंचायतों को 100 एमबी डाटा ट्रांसफर स्पीड के नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा।

प्रधानमंत्री के सलाहकार डॉ. सैम पित्रोदा ने जीबीटीयू के दीक्षांत समारोह में पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि इंटरनेट व वीडियो कॉलिंग उपलब्ध कराने वाली वेबसाइट का दो प्रतिशत भारतीय ही उपयोग कर रहे हैं। जब यह संख्या बढ़ेगी तब नेटवर्क पर जोर बढ़ेगा और रफ्तार घटेगी।

इससे निपटने में फाइबर नेटवर्क ही एक विकल्प साबित होगा। इंटरनेट पर भारत की क्षेत्रीय जानकारियां कम हैं। क्षेत्रीय जानकारियां अपलोड की जाएं।

नहीं मिली 100 प्रतिशत साक्षरता दर
डॉ. सैम ने बताया कि वे 1980 में राजीव गांधी से पहली बार मिले थे। आठ महीने की जद्दोजहद के बाद यह मौका मिला था। इसके बाद देश में सूचना संचार क्रांति का सपना देखा गया।

राजीव गांधी के साथ उन्होंने ‘इंडिया-2011’ नाम का विजन डॉक्यूमेंट बनाया था जो आज भी उन्होंने संभाल कर रखा है। इसमें देश के लिए कई चीजें सोची गईं।

देश को आईटी शक्ति बनाने, ज्यादा यूनिवर्सिटीज स्थापित करने में देश सफल रहा तो 100 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करने, जनसंख्या वृद्धि दर शून्य करना अभी अधूरा है।


‘आप’ ने करप्शन मुद्दे को भुनाया
आम आदमी पार्टी को लेकर डॉ. पित्रोदा ने कहा कि पार्टी ने करप्शन को बड़ा मुद्दा बनाया क्योंकि करप्शन बिकता है। आप किसी पर भी करप्शन का आरोप लगा सकते हैं और आपको तवज्जो मिलने लगती है।

खुद ‘आप’ के साथ यह कब होता है, समय बताएगा। राजीव गांधी को बोफोर्स कांड में फंसाया गया। यह बताता है कि करप्शन का आरोप लगाकर भ्रमित करना आसान है।

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