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गढ़वाल विवि ने तोड़ा ‘हरक’ बनने का सपना
आफताब अजमत/अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 17 Oct 2013 11:35 PM IST
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हरक सिंह रावत की तरह राजनीति में मुकाम हासिल करने का सपना देख रहे एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विश्वविद्यालय के कई शिक्षकों और कर्मचारियों का सपना चूर-चूर हो गया है।
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विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद ने नौकरी के साथ चुनावी मैदान में उतरने की मांग को खारिज कर दिया है। समिति ने इसके पीछे सेंट्रल यूनिवर्सिटी और सेंट्रल सर्विस नियमों का हवाला दिया है।
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चुनाव लड़ने की अनुमति
विश्वविद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी लंबे समय से चुनाव लड़ने की अनुमति मांग रहे हैं। उनका तर्क है कि जब वर्तमान कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत विवि में शिक्षक रहते हुए चुनाव लड़ सकते हैं तो बाकी क्यों नहीं।
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सेंट्रल सर्विस नियमावली का हवाला
इलाहाबाद विवि में फिजिक्स प्रोफेसर रहते हुए डा. मुरली मनोहर जोशी ने राजनीति में कदम रखा था। थराली विधायक जीतराम कुमाऊं विवि में प्रोफेसर रह चुके हैं। हालांकि, यह सभी नेता राज्य विश्वविद्यालय में शिक्षक रहे हैं।
वर्ष 2009 में विश्वविद्यालय को केंद्रीय दर्जा मिलने के बाद शिक्षकों व कर्मचारियों के बाहरी चुनाव में प्रतिभाग करने पर रोक लगा दी गई थी। बृहस्पतिवार को वाडिया इंस्टीट्यूट में हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में सभी सदस्यों ने सेंट्रल सर्विस नियमावली का हवाला देते हुए इस मांग को खारिज कर दिया।
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337 युवाओं को मिलेगी पीएचडी
बैठक में तय हुआ कि थीसिस जमा कर वाइवा करवाने वाले 337 युवाओं को जल्द पीएचडी की डिग्री दी जाएगी। विवि के शिक्षक मंजुला राणा के उत्तराखंड लोक सेवा आयोग, डा. पी बडोनी के स्पर्श गंगा बोर्ड और डा. बीएस बागड़ी के हिमगिरी जी विवि में डेपुटेशन पर जाने को मंजूरी दी गई।
फरवरी 2014 में कुलपति प्रो. एसके सिंह के रिटायरमेंट को देखते हुए नए कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी के गठन को भी मंजूरी दी गई। साथ ही सिलेबस में परिवर्तन संबंधी सभी मामलों को मंजूरी दे दी गई।
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प्रमोशन को हरी झंडी
शिक्षकों के प्रमोशन को भी बैठक में हरी झंडी दे दी गई। तय किया गया है कि वर्ष 2009 के बाद के शिक्षकों के प्रमोशन यूजीसी की नई नियमावली के तहत होंगे, जबकि वर्ष 2003 व 04 के शिक्षकों के प्रमोशन पुरानी नियमावली के तहत किए जाएंगे।
वहीं, विवि में पहले से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दी जाएगी। माना जा रहा है कि इससे करीब 170 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
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भर्ती विवाद पर बहस
विवि के सेंटर फोर माउंटेन टूरिज्म एंड हास्पिटैलिटी स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती विवाद पर भी चर्चा हुई। इस मामले में कुलपति और कुलसचिव की समिति ने रिपोर्ट कार्यकारी समिति के सामने रखी। बैठक में साफ हुआ कि उस पांच उम्मीदवार इस पद के योग्य नहीं थे। इन उम्मीदवारों की भर्ती हुई या नहीं, यह जांच का विषय है।
ईसी बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस भी हुई। सदस्यों ने चेतावनी दी कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए। बैठक में कुलपति प्रो. एसके सिंह, कुलसचिव डा. पीएस राना, राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों सहित अन्य लोग शामिल हुए।