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गढ़वाल विवि 337 युवाओं को बनायेगा 'डॉक्टरेट'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 18 Oct 2013 06:57 PM IST
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गढ़वाल विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में सात सितंबर की अकादमिक परिषद की सिलेबस में परिवर्तन संबंधी सभी बदलावों पर मुहर लग गई।
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वहीं, कई विवादित मुद्दों पर भी समिति के सदस्यों ने एप्रूवल दिया। वाडिया इंस्टीट्यूट में आयोजित बैठक में सबसे पहले गढ़वाल विवि में थीसिस जमा कर वाइवा करवाने वाले 337 युवाओं की पीएचडी पर मुहर लगाई गई।
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डेपुटेशन पर जाने को मंजूरी दी
इन शोधार्थियों को जल्द ही डिग्री दी जाएगी। विवि के शिक्षक मंजुला राणा के उत्तराखंड लोक सेवा आयोग, डा. पी बडोनी के स्पर्श गंगा बोर्ड और डा. बीएस बागड़ी के हिमगिरी जी विवि में डेपुटेशन पर जाने को मंजूरी दी गई।
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फरवरी 2014 में कुलपति प्रो. एसके सिंह की रिटायरमेंट को देखते हुए नए कुलपति की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी के गठन को भी मंजूरी दी गई। बैठक में कुलपति प्रो. एसके सिंह, कुलसचिव डा. पीएस राना, राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्यों सहित अन्य लोग शामिल हुए।
प्रमोशन को हरी झंडी
शिक्षकों के प्रमोशन को भी बैठक में हरी झंडी दे दी गई। तय किया गया है कि वर्ष 2009 के बाद के शिक्षकों के प्रमोशन यूजीसी की नई नियमावली के तहत होंगे, जबकि वर्ष 2003 व 04 के शिक्षकों के प्रमोशन पुरानी नियमावली के तहत किए जाएंगे।
संविदा कर्मियों को तोहफा
विवि में पहले से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को भर्ती प्रक्रिया में आयु सीमा में पांच वर्ष की छूट दी जाएगी। माना जा रहा है कि इससे करीब 170 कर्मचारी लाभान्वित होंगे।
भर्ती विवाद पर बहस
विवि के सेंटर फोर माउंटेन टूरिज्म एंड हास्पिटैलिटी स्टडीज में असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती विवाद पर भी चर्चा हुई। इस मामले में कुलपति और कुलसचिव की समिति ने रिपोर्ट कार्यकारी परिषद के सामने रखी। बैठक में साफ हुआ कि उस पांच उम्मीदवार इस पद के योग्य नहीं थे।
इन उम्मीदवारों की भर्ती हुई या नहीं, यह जांच का विषय है। ईसी बैठक में इस मुद्दे पर तीखी बहस भी हुई। सदस्यों ने चेतावनी दी कि ऐसा दोबारा नहीं होना चाहिए।