पढ़िए, कैसे बनाई गई थी लखनऊ यूनिवर्सिटी की जाली मार्क्सशीट
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जाली मार्क्सशीट तैयार करने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के दस्तावेजों से भी छेड़छाड़ की गई। जालसाजों ने जाली मार्क्सशीट के लिए न सिर्फ दूसरों को अलाट रोल नंबर मुहैया कराए, बल्कि अवार्ड लिस्ट में भी ओवर राइटिंग कर वह हर कोशिश की जिससे गड़बड़ी पकड़ी न जाए।
अनुदेशक भर्ती के लिए लखीमपुर खीरी से एलयू में सत्यापन के लिए आई कई मार्क्सशीट के रोल नंबर यूनिवर्सिटी के रोल नंबर से मैच खा रहे हैं। वहीं इन रोल नंबर की अवार्ड लिस्ट में ओवरराइटिंग नजर आ रही है।
यह इस बात की ओर सीधा संकेत है कि इस गोरखधंधे में एलयू के कर्मचारी भी शामिल हैं। परीक्षा नियंत्रक ने इस खेल में बाबुओं की भूमिका के साथ ही अवार्ड लिस्ट में छेड़छाड़ की भी जांच कराने की बात कही है।
साफ नजर आ रही थी ओवर राइटिंग
एलयू में पिछले 15 दिन में ही बीए और बीपीएड की 94 जाली मार्क्सशीट सत्यापन के दौरान पकड़ी गई हैं। बीपीएड की मार्क्सशीट में कई ऐसे कॉलेजों की भी हैं जहां पर बीपीएड कोर्स ही नहीं चलता है। दूसरी कई मार्क्सशीट ऐसी भी हैं जिन पर विवि के असली रोल नंबर पड़े हुए हैं।
नियमानुसार अवार्ड लिस्ट पर किसी प्रकार की ओवरराइटिंग नहीं होनी चाहिए। एलयू के सूत्रों के अनुसार सत्यापन के लिए आईं मार्क्सशीट की अवार्ड लिस्ट में ओवरराइटिंग नजर आ रही है। इससे विवि के कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका गहरा गई है।
इससे पहले वर्ष 2010 में मुजफ्फरनगर डायट से सत्यापन के लिए आई मार्क्सशीट जाली साबित हुई थीं उसमें भी अवार्ड लिस्ट के साथ छेड़छाड़ की बात सामने आई थी।
वर्ष 2011 में चंडीगढ़ में पकड़ी गईं लविवि की फर्जी मार्क्सशीट मामले में भी अवार्ड लिस्ट से छेड़छाड़ की बात सामने आई थी। लविवि परीक्षा नियंत्रक एसके शुक्ला के अनुसार अभी कुछ नहीं कहा जा सकता वे हर पहलू पर जांच करवा रहे हैं। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
यूनिवर्सिटी में नहीं रखी जाती प्रिंटेड अवार्ड लिस्ट
लखनऊ विश्वविद्यालय में अवार्ड लिस्ट रखने में पूरी सावधानी नहीं बरती जाती। कायदे से लविवि की अवार्ड लिस्ट प्रिंटेड होनी चाहिए और उन्हें लेमिनेशन कराके रखा जाना चाहिए। प्रिंटेड और लेमिनेटेड होने पर अवार्ड लिस्ट में छेड़छाड़ की गुंजाइश नहीं होगी। इसके बावजूद लविवि में प्रिंटेड अवार्ड लिस्ट रखने का चलन ही नहीं है।
लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से जाली अंकपत्र मामले की जांच करने के लिए विधि संकायाध्यक्ष प्रो. आरआर लॉयल की अध्यक्षता में समिति गठित करने की बात कही गई है। इसके बावजूद बुधवार शाम तक जांच समिति के सदस्यों को इस संबंध में सूचना नहीं दी गई है। डीन विवि संकाय प्रो. आर आर लॉयल के अनुसार अभी तक उन्हें इस संबंध में कोई सूचना नहीं दी गई है।