उत्तराखंडः अब सरकारी स्कूलों से खुलेंगे नौकरी के द्वार
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उत्तराखंड बोर्ड के 12वीं के छात्रों के लिए अब स्कूलों से ही रोजगार के द्वार खुलने लगेंगे। दरअसल, शिक्षा विभाग सत्र 2015-16 से हाईस्कूल, इंटरमीडिएट में आईटी, आटोमोबाइल, रिटेल, पेशेंट केयर जैसे कई कोर्स को बतौर विषय पाठ्यक्रम में शामिल करने वाला है।
उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता के बाद 44 स्कूलों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा। दावा है कि यह कोर्स करने वाले छात्र 12वीं के बाद ही देश की नामी कंपनियों में प्लेसमेंट भी हासिल कर सकेंगे।
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा शिक्षा अभियान (रमसा) के तहत नये साल से स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा की शुरुआत की जा रही है। कक्षा नौ से शुरू होने वाले इन कोर्स के चार स्तर कक्षा 12 तक चलेंगे। हाईस्कूल में परीक्षार्थी सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, रिटेल, पेंशेट केयर, सिक्योरिटी और टूरिज्म में से कोई एक विषय छठे विषय के रूप में चुन सकेंगे।
रमसा के संयुक्त निदेशक एमएस बिष्ट ने बताया कि नवीं से इंटरमीडिएट तक छात्र-छात्राओं को इनमें से किसी एक ट्रेड में चार लेबल पास करने होंगे। कंपनियों के साथ यह अनुबंध किया जा रहा है कि लेबल चार पास करते ही 70 फीसदी छात्र-छात्राओं को नामी कंपनियों में प्लेसमेंट मिल सके।
44 स्कूलों में होगी व्यवसायिक शिक्षा की शुरुआत
शिक्षा महानिदेशक राधिका झा बताती हैं कि इस संबंध में रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल तैयार कर उत्तराखंड शासन के पीपीपी सेल को भेजा गया है। एक अप्रैल से सभी चयनित 44 स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा की शुरुआत हो जाएगी।
पाठ्यक्रम तैयार
व्यावसायिक शिक्षा विषयों के लिए एनसीईआरटी नई दिल्ली द्वारा पंडित सुंदरलाल शर्मा सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ वोकेशनल एजुकेशन भोपाल के सहयोग से पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। जिसे एससीईआरटी द्वारा हिंदी में अनुवादित कर परिषद कार्यालय को उपलब्ध कराया जा रहा है।
एनएसडीसी देगी प्रमाणपत्र
स्कूलों में बच्चों को व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई एनएसडीसी (नेशनल स्किल डवलपमेंट कार्पोरेशन) के विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा कराई जाएगी। एनएसडीसी ही बच्चों को तकनीकी प्रमाणपत्र भी देगी।
देखने में आया है कि तकनीकी रूप से दक्ष न होने से हाईस्कूल व इंटर पास युवकों को नौकरी नहीं मिल पाती। व्यावसायिक शिक्षा के रूप होने से पहाड़ के बच्चे दक्ष होंगे जो अपने ही प्रदेश में काम पा सकेंगे।
- राधिका झा, शिक्षा महानिदेशक