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बिना संबद्धता के ही इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिले
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Sun, 08 Dec 2013 02:39 AM IST
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उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) में बिना संबद्धता के 50 इंजीनियरिंग कॉलेजों में हजारों स्टूडेंट्स को दाखिला देने का खेल उजागर हुआ है।
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इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कुलपति डॉ. आरके खांडल ने रजिस्ट्रार यूएस तोमर को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इस मामले की जांच के लिए अरूणाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जीएन पांडेय की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी गई है।
प्रथम सेमेस्टर में विभिन्न कॉलेजों में पढ़ रहे छात्रों को 21 दिसंबर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होने के कारण प्राविधिक शिक्षा विभाग में भी हड़कंप मच गया है। यूपीटीयू में बिना संबद्घता के ही अधिकारियों ने खेल करके नियम विरूद्घ संबद्घता की रेवड़ियां बांट दी।
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इसके दम पर प्रदेश के इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों ने धड़ाधड़ प्रवेश कर डाले। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 15 मई 2013 को संबद्घता की प्रक्रिया को खत्म करने का आदेश दिया था।
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लेकिन आपसी सांठगांठ के चलते इस पूरे खेल को बड़ी सफाई से अंजाम दे दिया गया। मगर शासन ने इन कॉलेजों की संबद्घता का अनुमोदन करने से इंकार कर दिया है।
संबद्घता का अनुमोदन न होने के कारण छात्रों का भविष्य अधर में फंस गया है। फिलहाल अब मामला खुलने पर कुलपति डॉ. आरके खांडल ने अरूणांचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति जीएन पांडेय की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया गया है।
इस कमेटी में डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. गुरदीप सिंह व विजलेंस विभाग के पूर्व अध्यक्ष एसएन झा भी शामिल हैं।
इस कमेटी से एक हफ्ते में मामले की रिपोर्ट देने की अपेक्षा की गई है। फिलहाल इस प्रकरण पर विवि का कोई भी अधिकारी कुछ भी साफ-साफ कहने से बच रहा है।
कॉलेजों को संबद्घता देने वाली कमेटी के अध्यक्ष खुद प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा होते हैं और सदस्य सचिव के रूप में यूपीटीयू के स्थायी रजिस्ट्रार यूएस तोमर शामिल हैं।
सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले में कुलपति को भी गुमराह कर दिया गया। यही कारण है कि इस प्रकरण के खुलने पर वह सख्त रूख अपनाए रहे हैं।
आखिर छात्रों के भविष्य का क्या होगा?
फिलहाल कुलपति डॉ. आरके खांडल की ओर से रजिस्ट्रार यूएस तोमर को कारण बताओ नोटिस जारी कर उनसे पूछा है कि आखिर शासन के अनुमोदन के बगैर संबद्घता क्यों दी गई।
इसके आधार पर कुल कितने स्टूडेंट का दाखिला किया गया इसकी वास्तविक संख्या भी बताएं। वहीं शासन को पत्र लिखकर कुलपति ने यह भी पूछा है कि इन स्टूडेंट्स के भविष्य का क्या किया जाए।
फिलहाल इन सभी स्टूडेंट्स को 21 दिसंबर से होने वाली सेमेस्टर परीक्षा में बैठने से रोक दिया गया है। उन्होंने यह पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरूद्घ इन स्टूडेंट्स को प्रवेश दिया गया है अब इनका क्या किया जाए।