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अब यूं ही नहीं मिला सकेंगे विदेशी संस्थानों से हाथ
अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 04 Nov 2013 10:09 PM IST
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विदेशी शिक्षा संस्थानों के साथ समझौता कर छात्रों को विदेशी शिक्षा दिलाने का दावा करने वाले कालेजों, संस्थानों को अब सतर्क होना होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से इस संबंध में नए दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं।
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यूजीसी निर्देशानुसार विवि अनुदान आयोग विनिमय 2012 (भारतीय एवं विदेशी शैक्षिक संस्थानों के मध्य अकादमिक सहभागिता के मानकों की प्रोन्नति एवं अनुरक्षण) का सभी भारतीय शिक्षा संस्थानों को पालन करना अनिवार्य होगा। भारतीय शैक्षिक संस्थानों के साथ सहभागिता एवं जुड़वां व्यवस्था के लिए केवल ऐसे विदेशी संस्थानों को अनुमति होगी, जिन्हें अपने देश में सर्वोच्च ग्रेड प्राप्त हो।
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इसी तरह भारत में भी केवल वही शिक्षा संस्थान विदेशी संस्थानों से हाथ मिला सकेंगे, जिन्हें संस्थागत प्रत्यायन की दृष्टि से बी या इसके समतुल्य ग्रेड प्राप्त हो।
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विदेशी संस्थाओं ने किया अनुबंध
अहम बात यह है कि जिन भारतीय शिक्षा संस्थानों ने पहले से विदेशी संस्थानों के साथ अनुबंध किया है, उन्हें भी छह माह के भीतर सभी औपचारिकताओं को चेक करना होगा। इसके साथ ही किसी भी संस्थान (देसी या विदेशी) को बिना यूजीसी की अनुमति डिग्री, स्नातकोत्तर डिप्लोमा देने का अधिकार नहीं होगा।
गौरतलब है कि दून में ग्राफिक एरा विवि, यूनिवर्सिटी आफ पेट्रोलियम एंड एनर्जी स्टडीज, डीआईटी विवि, उत्तरांचल विवि जैसे कई संस्थान विदेशी शिक्षा संस्थानों के साथ मिलकर कोर्स करा रहे हैं।