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उत्तराखंडः अब स्कूलों में 10वीं तक पढ़ाई जाएंगी ये लोक भाषाएं

Mon, 11 Jan 2016 01:09 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 11 Jan 2016 01:09 PM IST
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Folk Languages will teach in uttarakhand school.

उत्तराखंड प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में कक्षा एक से दसवीं तक अब गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी के साथ ही रं (धारचूला में भोटिया जनजाति) को भी शामिल किया जाएगा।

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लोक भाषाओं के संबंध में मुख्यमंत्री हरीश रावत के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। एससीईआरटी की निदेशक कुसुम पंत बताती हैं कि इसी महीने प्रदेश की छह डायटों (जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान) में कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, इसमें विषय विशेषज्ञ पाठ्य सामग्री तैयार करेंगे।
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प्रदेश में 75 लाख से अधिक लोग गढ़वाली और कुमाऊंनी बोलते एवं समझते हैं। कई पुस्तकें गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी में प्रकाशित हुई हैं। विभिन्न विश्वविद्यालयों में इन भाषाओं पर शोध हो रहे हैं, लेकिन प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम में इन्हें शामिल नहीं किया गया है।

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मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शामिल करने की कवायद

Folk Languages will teach in uttarakhand school.

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की निदेशक कुसुम पंत के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्रदेश की लोक भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल करने की कवायद की जा रही है। उन्होंने बताया कि कुमाऊंनी के संबंध में अल्मोड़ा में 18 जनवरी को आयोजित कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ पाठ्यसामग्री तैयार करेंगे।

इसी महीने जौनसारी के बारे में दून डायट में, गढ़वाली के बारे में चमोली डायट में और रं के संबंध में पिथौरागढ़ में कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।

उन्होंने बताया कि लोक भाषाओं के अलावा हर जिले की संस्कृति, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और क्षेत्र की विशिष्ट पहचान के संबंध में रुड़की और रुद्रपुर के डायटों में काम किया जा रहा है। प्रदेश की विभिन्न छह डायटों के बाद राज्य स्तर पर विषय विशेषज्ञों को आमंत्रित कर पाठ्य सामग्री तैयार की जाएगी।

स्थानीय बोली भाषाओं को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना है। इसमें यह ध्यान रखा जा रहा है कि इनके शामिल होने से बच्चों के बस्ते पर भार न पड़े। ऐसे में पाठ्यपुस्तक में ही कुछ पाठ लोक भाषा और क्षेत्र की पहचान से संबंधित हो सकते हैं।
- नंद किशोर हटवाल, प्रवक्ता एससीईआरटी

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