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अगर स्कूल सताए तो ये उपाय अपनाएं

Thu, 19 Mar 2015 10:39 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 19 Mar 2015 10:39 AM IST
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fee increases issue in public school.

एजुकेशन हब देहरादून में निजी स्कूलों की लूटमार से अभिभावक परेशान हैं। शुल्क बताया कुछ जाता है और वसूला कुछ।

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कई शुल्क तो ऐसे हैं, जिनका कोई प्रमाण ही नहीं होता। ऐसे में पब्लिक स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाना निश्चित तौर पर मुश्किल काम तो है, लेकिन नामुमकिन बिल्कुल नहीं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावक चुप्पी तोड़कर सामने आएं तो मनमाने स्कूलों को घेरा जा सकता है। इस मुद्दे पर पेश है पूर्व अतिरिक्त शिक्षा निदेशक एनएस राणा और वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस राघव की राय...
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शिकायत के लिए कई हैं दरवाजे
अभिभावक संबंधित स्कूल के खिलाफ शिक्षा विभाग के साथ ही जिला प्रशासन में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शहर का स्कूल है तो पहले नगर शिक्षा अधिकारी और फिर खंड शिक्षा अधिकारी के पास शिकायत दर्ज कराएं। सुनवाई न हो तो पहले मुख्य शिक्षा अधिकारी और फिर अपर शिक्षा निदेशक गढ़वाल मंडल से शिकायत करें। महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा से भी लिखित शिकायत कर सकते हैं। अंत में प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को भी लिखित शिकायत भेजी जा सकती है। लेकिन, ध्यान रखें कि हर शिकायत की रिसीविंग कॉपी जरूर प्राप्त करें। इसके अलावा सिटी मजिस्ट्रेट, संबंधित एसडीएम और इसके बाद जिलाधिकारी को शिकायत की जा सकती है।
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- एनएस राणा, पूर्व अतिरिक्त शिक्षा निदेशक, गढ़वाल मंडल

कानून का सहारा लें
स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए अभिभावकों के पास कानूनी तौर पर दो विकल्प हैं। पहले अभिभावक उपभोक्ता फोरम में शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए बच्चे के दाखिले का प्रमाण होना चाहिए।

इसके अलावा फीस जमा करने का रिकॉर्ड, सत्र के शुरू में दिए जाने वाले शुल्क चार्ट का प्रमाण और बीच में की गई बेवजह वसूली का प्रमाण होना अनिवार्य है। कानूनी सहायता के लिए शुल्क दावे के अनुसार और मामूली होता है। अधिकारियों और नौकरशाहों से सहायता न मिलने पर अंतिम विकल्प उच्च न्यायालय का बचता है।

यहां जनहित याचिका भी दायर की जा सकती है। याचिका के लिए सबसे पहले तो संबंधित विभाग और अधिकारियों को की गई शिकायतों का लिखित प्रमाण, बच्चे के दाखिले का प्रमाण, शुल्क का प्रमाण और हो सके तो मीडिया में आई खबरों की कॉपी भी हो। दिल्ली उच्च न्यायालय में कई बार अभिभावकों की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यवस्थाएं सुधरवाई हैं।
- आरएस राघव, वरिष्ठ अधिवक्ता

लूट के बहाने

1- एक स्कूल में छात्रों से चीला में टूर के लिए 4000 रुपये प्रति छात्र वसूला गया। छात्रों को बस में भरकर एक चक्कर लगाकर वापस छोड़ दिया गया। अभिभावक का कहना है कि चीला तक चार हजार रुपये में जाना और आना, लूट नहीं तो क्या है।


2- एक स्कूल में शिक्षकों की नई भर्ती हुई। भर्ती के लिए यह शर्त रखी गई कि जो शिक्षक स्कूल में पढ़ाएगा, उसे यहां से वेतन तो मिलेगा लेकिन जो वह ट्यूशन में पढ़ाएगा, उसका 50 प्रतिशत हिस्सा स्कूल में जमा करना होगा। यानी शिक्षक को ट्यूशन पढ़ाने की छूट और अभिभावकों से लूट।

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