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पीयू को चेताया, बेटे को नौकरी न दी तो सुसाइड कर लूंगा

Fri, 02 May 2014 09:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 02 May 2014 09:13 AM IST
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Father give Warning of Hunger Strike till Death

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) की ओर से सहायक प्रोफेसर के पद पर चयनित हुए उम्मीदवार को नियुक्ति पत्र देने में की जा रही देरी से नाराज होकर अब इस उम्मीदवार के पूरे परिवार ने आमरण अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।

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पीयू के यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (यूसोल) के लोक प्रशासन विभाग में चयनित हुए उम्मीदवार अनिल कुमार के पिता ने पीयू और यूटी प्रशासन के अधिकारियों के साथ साथ राष्ट्रपति, पीयू के कुलाधिपति को पत्र भेजकर स्पष्ट किया है कि अगर उनके बेटे को एक माह के अंदर नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया तो उनका पूरा परिवार आमरण अनशन शुरू कर देगा और उनके परिवार को अगर कुछ भी होता है तो इसके लिए पीयू प्रशासन जिम्मेदार होगा।
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अनिल कुमार और उनके परिवार के सब्र का बांध टूट चुका है और अब मजबूर होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ रहा है। अनिल कुमार का परिवार झांसी में रहता है।

आचार संहिता के चलते हो रही देरी
अनिल कुमार पिछले डेढ़ साल से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। पहले सिंडीकेट की राजनीति में यह नियुक्ति उलझी रही और अब पीयू चुनाव आचार संहिता के लागू होने का हवाला देकर नियुक्ति पत्र जारी करने में देरी कर रहा है।
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हालांकि, अनिल कुमार के पिता ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि इन नियुक्तियों पर चुनाव आचार संहिता लागू नहीं होती है, क्योंकि यह नियुक्तियां दिसंबर, 2012 में हुई चयन समिति की बैठक में हुई थी। पीयू के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव आचार संहिता के हटते ही नियुक्ति पत्र जारी कर दिया जाएगा।

चार सहायक प्रोफसरों के लिए हुए थे इंटरव्यू
ध्यान रहे कि यूसोल और लोक प्रशासन विभागों में चार सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति के लिए इंटरव्यू 19 और 20 दिसंबर, 2012 को हुए थे। लगभग एक साल तक सिंडीकेट की राजनीति के कारण यह नियुक्तियां लटकी रहीं।

पीयू सिंडीकेट की 8 अक्तूबर, 2013 को हुई बैठक में सिंडीकेट ने इन नियुक्तियों पर विचार करने से मना कर दिया था। सिंडीकेट सदस्यों का कहना था कि इन नियुक्तियों पर विचार इसलिए नहीं हो सकता है क्योंकि वीसी ने 27 जनवरी, 2013 को हुई बैठक में इसे वापस ले लिया था।

इसके बाद 8 दिसंबर, 2013 को सीनेट की बैठक में इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ था और इसके बाद सीनेट ने इसे सिंडीकेट को विचार के लिए रेफर कर दिया था।

सिंडीकेट ने कमेटी गठित करने का लिया था निर्णय
सिंडीकेट ने 4 जनवरी, 2014 को एक साल से लटकी पड़ी इन नियुक्तियों के मामले में एक कमेटी को गठित करने का फैसला लिया और कमेटी को ही सिंडीकेट की तरफ से अंतिम फैसला लेने के लिए अधिकृत कर दिया है।


कुलपति ने गोपाल कृष्ण चतरथ की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी थी। लेकिन, कमेटी की रिपोर्ट जब आई तब चुनाव आचार संहिता लगी हुई थी। ऐसे में अनिल कुमार व अन्य तीन चयनित उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र जारी न हो सके।

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