डीएवी में 175 दाखिले फर्जी, घेरे में कॉलेज प्रशासन
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राजधानी दून के डीएवी पीजी कॉलेज में मेरिट से दाखिले होने के बावजूद 175 छात्रों ने फर्जी ढंग से एडमिशन ले लिया। अनुमन्य सीटों के आधार पर कॉलेज प्रशासन ने जांच करवाई तो फर्जीवाड़ा सामने आ गया। एडमिशन प्रक्रिया मेरिट बेस होने के बावजूद घपला मिलने पर कॉलेज प्रशासन की भूमिका भी शक के दायरे में है। प्राचार्य ने छात्र और दाखिले से जुड़े कर्मचारियों की जांच बैठा दी है। साफ किया है कि मामला फर्जी साबित होने पर दाखिले रद्द हो जाएंगे।
डीएवी कॉलेज में इस बार फर्जीवाड़ा रोकने के लिए एडमिशन मेरिट के आधार हुए। प्रमाण पत्रों की जांच के बाद लिस्ट में शामिल छात्रों को ही प्रवेश दिया गया। इसके बावजूद बीए में 175 छात्रों ने फर्जी तरीके से दाखिले ले लिए। इन्हें क्यूआर कोड लैस आई कार्ड भी मिल गया।
जांच के दौरान इन छात्रों का नाम मेरिट लिस्ट में नदारद मिला। प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन ने कहा कि इन छात्रों को सफाई देने के लिए मंगलवार दोपहर तीन से शाम पांच बजे तक का वक्त दिया जा रहा है। वह जांच कमेटी के सामने तर्क रख सकते हैं। इसके बाद इन छात्रों के दाखिले रद्द कर दिए जाएंगे। कॉलेज प्रबंधन को भी सूचना दे दी गई है। अगर कोई कर्मचारी संलिप्त मिला तो कार्रवाई के लिए प्रबंधन से सिफारिश की जाएगी।
इसलिए उठे सवाल
गत वर्षों की तुलना में इस वर्ष डीएवी में सिर्फ अनुमन्य सीटों पर दाखिले लिए गए। आवेदन ज्यादा होने पर कॉलेज प्रशासन ने मेरिट से प्रवेश दिया। एक मेरिट लिस्ट जारी की गई, जिसकी कॉपी एडमिशन कमेटी को भी दी गई। शॉर्ट लिस्ट छात्रों की पड़ताल के बाद दस्तावेज जांचे गए, फिर एडमिशन दिया गया। छात्र का पूरा रिकॉर्ड क्यूआर कोड के जरिए आईकार्ड पर भी दिया गया। बेहद सुरक्षित प्रक्रिया अपनाने के बावजूद अगर फर्जी दाखिले हुए हैं तो निश्चित तौर पर दाखिलों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी शक के दायरे में हैं।
छात्र संगठनों पर घूमी सुई
हर साल छात्र संघ चुनावों में एक-एक वोट के लिए लड़ने वाले छात्र संगठनों के लिए भी यह फर्जी दाखिले काम आए होंगे। दरअसल, कई संगठन हर साल फर्जी दाखिले कराते हैं। आईकार्ड जारी होने के बाद ऐसे छात्र वोट डालते हैं। इसके बाद इनकी कोई सुध नहीं लेता। कॉलेज प्रशासन यह पड़ताल भी करवा सकता है कि फर्जीवाड़े में कोई छात्र संगठन तो शामिल नहीं है।
छात्रों के हक में कॉलेज, ईवनिंग में देगा चांस
कॉलेज प्रशासन का रवैया छात्रों के हक में नजर आ रहा है। प्राचार्य डा. भसीन ने कहा कि अगर ऐसे फर्जी छात्र चाहेंगे तो वह ईवनिंग क्लासेज का मेरिट फार्म भर सकते हैं। उन्हें इधर ही एडजस्ट किया जाएगा। जबकि नियमानुसार ऐसे फर्जीवाड़े पर छात्रों या फर्जी दाखिला करने व कराने वालों पर मुकदमा दर्ज होना चाहिए। बीते वर्ष भी एससी-एसटी के फर्जी दाखिले पकड़ में आए थे, लेकिन कॉलेज ने कानूनी कार्रवाई नहीं की थी।
विवि के पत्र का भी असर
गढ़वाल विवि ने कॉलेजों को एक पत्र जारी किया है। इसमें लिखा है कि किसी भी कॉलेज ने अनुमन्य सीटों से ज्यादा दाखिले किए तो कॉलेज ही उसका जिम्मेदार होगा। परीक्षा फार्म भरवाकर परीक्षा भी करा दी गई तो विवि परिणाम रोक देगा। कॉलेज की इस कार्रवाई को विवि के इस पत्र से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
ईवनिंग क्लासेज में आवेदन का अंतिम दिन
डीएवी में ईवनिंग क्लासेज प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू हुई। सोमवार को कॉलेज में मेरिट फार्म बिके। मंगलवार को फार्म बिक्री का अंतिम दिन है। जिन छात्रों ने बीए, बीएससी और बीकॉम प्रथम वर्ष ईवनिंग क्लास के लिए फार्म नहीं भरा है, वह दस रुपये का फार्म भरकर जमा करा सकते हैं। इसके बाद कॉलेज मेरिट लिस्ट तैयार करेगा।