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यूपी बोर्ड: ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के नाम पर छात्रों से वसूली

Mon, 19 Aug 2013 10:20 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/ब्यूरो/इंटरनेट डेस्क Updated Mon, 19 Aug 2013 10:20 PM IST
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नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन से नकल माफिया पर लगाम भले न लग पाए लेकिन छात्रों की मुसीबत और बढ़ गई है।

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यूपी बोर्ड के ज्यादातर विद्यालयों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, जिससे वे साइबर कैफे पर निर्भर हैं। इससे जहां साइबर कैफे वालों की चांदी हो गई, वहीं कॉलेज वालों को भी छात्रों से वसूली का मौका मिल गया।
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जानकारों का कहना है कि दाखिले की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी लेकिन रजिस्ट्रेशन के लिए एक अक्टूबर तक का समय दे दिया गया है। अभी यह तारीख और बढ़ भी सकती है।
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ऐसे में नकल माफिया मनचाहे तरीके से फर्जी रजिस्ट्रेशन करने में भी सफल हो जाएगा। ‘नौवीं फेल, दसवीं पास’ का धंधा रोकने के लिए यूपी बोर्ड ने करीब 10 साल पहले नौवीं और ग्यारहवीं कक्षा में रजिस्ट्रेशन का नियम बनाया था।

इसके मुताबिक जिनका इन कक्षाओं में रजिस्ट्रेशन होगा, उन्हें ही दसवीं और बारहवीं में अगले साल बोर्ड परीक्षा में शामिल होने की अनुमति मिलेगी।

इस नियम में भी नकल माफिया ने सेंध लगा दी। यही वजह है कि पिछले साल से बोर्ड ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था शुरू कर दी ताकि बाद में कोई ‘खेल’ न कर सके।

बोर्ड ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेश्न तो शुरू कर दिया है लेकिन नकल माफिया के लिए मौका तो छोड़ ही दिया है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तभी तक ठीक है जब बच्चे के दाखिले के दिन ही रजिस्ट्रेशन हो जाए और शिक्षा विभाग के पास छात्रों का ऑनलाइन ब्यौरा हो।

दाखिले की अंतिम तारीख 31 जुलाई थी। रजिस्ट्रेशन अगस्त में शुरू हुआ है और इसके लिए एक अक्टूबर तक का समय दे दिया है। इतना समय मिलने पर नकल माफिया फर्जी रजिस्ट्रेशन भी करवा सकता है।


इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक बासुदेव यादव और संयुक्त शिक्षा निदेशक अनारपति वर्मा से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन वे उपलब्ध नहीं हो सके।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि ज्यादातर कॉलेजों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है। जहां है भी, वहां प्रशिक्षित शिक्षक या कर्मचारी नहीं हैं।

आईसीटी योजना के तहत एडेड कॉलेजों को कम्प्यूटर दिए गए थे लेकिन वहां भी इन पर कोई कामकाज नहीं हो रहा। यहां प्रशिक्षित शिक्षक या कर्मचारी नहीं हैं।

गांव के कॉलेजों में तो बिजली भी नहीं आती। प्रदेश में 4500 एडेड कॉलेजों में से आधे में इंटरनेट सुविधा नहीं है। करीब 15 हजार निजी विद्यालयों में से 90 फीसदी के पास इंटरनेट और कंप्यूटर की सुविधा नहीं है।

वे साइबर कैफे पर ही रजिस्ट्रेशन करवा रहे हैं। ऐसे में साइबर कैफे वाला भले ही प्रति छात्र दो या पांच रुपये ले, पर कॉलेज वाले छात्रों से इसके नाम पर 100 रुपए तक वसूलते हैं। पिछले साल इस तरह की शिकायतें आई भी थीं।

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