हाईकोर्ट के आदेश पर परीक्षा में बैठे IIT से निकाले छात्र
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हाईकोर्ट की ओर से आईआईटी के छात्रों को बैक पेपर परीक्षा में बैठने की अनुमति दिए जाने के फैसले के बाद बृहस्पतिवार को कुछ छात्रों ने परीक्षा दी। अभी परीक्षा शुक्रवार को भी होनी है।
इसके बाद संस्थान प्रशासन हाईकोर्ट के फैसले से जुड़े परीक्षार्थियों का डाटा कलेक्ट करेगा। जिसे हाईकोर्ट में सुनवाई से एक दिन पहले 20 जुलाई को अन्य मांगे गए जवाब के साथ जमा कराया जाएगा।
पांच से कम सीजीपीए पाने पर निकाले आईआईटी के 72 छात्रों के मामले में हाईकोर्ट की ओर से संस्थान को संबंधित छात्रों की बैक पेपर परीक्षाएं कराए जाने की आदेश दिए थे। मामले में हाईकोर्ट 21 जुलाई को सुनवाई करेगा। आईआईटी प्रशासन 20 जुलाई को हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करेगा।
नहीं शामिल हुए सभी छात्र, शुक्रवार को भी परीक्षा
वहीं हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर बृहस्पतिवार को संबंधित छात्रों ने बैक पेपर की परीक्षा दी। परीक्षा शुक्रवार को भी होगी। सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार को परीक्षा में 10 से 12 छात्र शामिल हुए। हालांकि संस्थान प्रशासन ने अभी परीक्षा देने वाले छात्रों का सही डाटा प्राप्त नहीं होने की बात कही है।
संस्थान उपनिदेशक प्रो. विनोद कुमार ने कहा कि परीक्षा शुक्रवार को भी होनी है। विभिन्न विभागों में कितने छात्रों ने परीक्षा दी है। इसका डाटा सोमवार तक कलेक्ट कर लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार बाहर निकाले गए 72 छात्रों में से करीब 40 छात्रों ने बैक पेपर परीक्षा का फार्म भरा था। ऐसे में बाकी छात्रों को परीक्षा का मौका नहीं मिल सका। प्रो. विनोद कुमार ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार जिन छात्रों ने बैक पेपर परीक्षा फार्म भरा था। उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान की गई है।
लेकिन छात्रों को नहीं मिल सके हॉस्टल
बाहर निकाले गए छात्र बृहस्पतिवार को हॉस्टल अलॉट किए जाने के लिए संस्थान के अधिकारियों से संपर्क करते रहे। लेकिन, उन्हें हॉस्टल नहीं दिया गया। इसके लिए कई छात्र प्रार्थनापत्र लेकर प्रशासनिक अधिकारियों के पास पहुंचे थे। लेकिन, उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिल सकी।
संस्थान अधिकारियों का कहना है कि हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद जो भी दिशा निर्देश मिलेंगे। उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
परीक्षा से वंचित छात्रों को फैसले का इंतजार
आईआईटी से बाहर निकाले गए छात्रों में से 30 से अधिक छात्र ऐसे हैं, जिन्होंने बैक पेपर परीक्षा का फार्म ही नहीं भरा था। माना जा रहा है कि इनमें वह छात्र हैं जिन्हें इस बात की आशंका थी कि बैक पेपर दिए जाने से उनका सीजीपीए नहीं सुधर पाएगा। ऐसे में इन छात्रों की निगाह 21 जुलाई को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी है।