डीयू में कार्यकारी कुलपति की कुर्सी पर सस्पेंस बरकरार
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डीयू के कुलपति प्रो. दिनेश सिंह के कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक दिन भी पद पर नहीं रहने की बात कहकर, उनके पद पर बने रहने की अटकलों पर विराम लगा गया है।
चयन समिति में के. कस्तूरीरंगन की जगह नए नाम आने से नए कुलपति की खोज में दो से तीन माह का समय लग सकता है। ऐसे में चर्चा है कि प्रो. सिंह का कार्यकाल खत्म होने के बाद कार्यकारी कुलपति का कार्यभार किसे मिलेगा?
डीयू के नियमों में कुलपति के जाने के बाद उनकी जगह समकुलपति और डीयू दक्षिणी परिसर निदेशक, या फिर डीन ऑफ कॉलेज को कार्यकारी कुलपति की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
वहीं उसके बाद रजिस्ट्रार, कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग निदेशक और उसके बाद प्रॉक्टर का नंबर आता है। डीयू सूत्रों के मुताबिक पहले ही कार्यकारी परिषद में कुलपति की टीम के सदस्यों की सेवानिवृत्ति की आयु 65 से बढ़ाकर 70 साल करने का प्रस्ताव पास हो चुका है।
ऐसे में समकुलपति को कार्यकारी कुलपति बनाया जा सकता है, लेकिन उनके इंकार करने पर डीन ऑफ कॉलेज को मौका मिल सकता है।
कुलपति को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस?
कुलपति का विरोध कर रहे एक धड़े का मानना है कि कुलपति को मंत्रालय की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी हुआ है। लिहाजा नोटिस की जिम्मेदारी कुलपति केसाथ-साथ उनकी टीम की भी है।
उनकी टीम में से किसी भी अधिकारी को कार्यकारी कुलपति का पद नहीं दिया जाना चाहिए। ऐसे में कहा जा रहा है कि समकुलपति और डीन ऑफ कॉलेज यह जिम्मेदारी लेने से इंकार कर सकते हैं।
इस सूरत में दक्षिणी परिसर के निदेशक को यह जिम्मेदारी मिल सकती है, मगर इस पर कहा जा रहा है कि नए कुलपति की नियुक्ति के लिए आयु सीमा 65 साल या उससे कम का नियम लागू है।
प्रोफसरशिप के लिए दस साल का नियम है। ऐसे में दक्षिणी परिसर निदेशक को भी जिम्मेदारी नहीं मिलनी चाहिए। ऐसे में यदि इन्हें भी जिम्मेदारी नहीं मिलती तो अगला नंबर कुलसचिव और कैंपस ऑफ ओपन लर्निंग निदेशक का आता है।
कहा जा रहा है कि यदि मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया तो कार्यकारी कुलपति पर भी खींचतान हो सकती है।