आखिर क्यों? एक ही परीक्षा में तीन बार बदलकर बांटना पड़ा पेपर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
साल के पहले ही दिन उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की लापरवाही बीटेक छात्रों के लिए मुसीबत बन गई। बीटेक पांचवें सेमेस्टर का पेपर आउट ऑफ सिलेबस होने की वजह से विवि को उसे तीन बार बदलना पड़ा।
इस वजह से परीक्षा में छात्रों के तीन घंटे ज्यादा लगे। विवि ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा है कि सिलेबस तय नहीं होने से यह समस्या आई।
तकनीकी विश्वविद्यालय की सेमेस्टर परीक्षाएं 22 दिसंबर से शुरू हुई थीं, जिनमें खामियां पहले ही दिन से सिरदर्द बनी हुई हैं। छात्र परेशान हैं। कई बार पेपर आउट ऑफ सिलेबस आ रहा है। इससे पहले कई केंद्रों पर खामियों की वजह से छात्र प्रदर्शन भी कर चुके हैं। लेकिन शुक्रवार को बड़ी लापरवाही सामने आई है।
ई मेल से भेजा दूसरा पेर पेपर, वो भी गलत
बीटेक पांचवें सेमेस्टर के छात्र जब टीसीएस 105 कोड का पेपर देने पहुंचे तो पूरा पेपर आउट ऑफ सिलेबस था। छात्रों ने इसकी शिकायत परीक्षा केंद्र में दर्ज कराई।
प्रदेश भर के परीक्षा केंद्रों से इस गड़बड़ी की सूचना मिली तो विवि ने तत्काल सभी छात्रों से पेपर वापस ले लिया। करीब आधा घंटे बाद दूसरा पेपर ई मेल के माध्यम से सभी परीक्षा केंद्रों को भेजा गया।
पेपर बांटा गया, लेकिन वह भी करीब 90 प्रतिशत आउट ऑफ सिलेबस था। नतीजतन विवि को यह भी पेपर वापस लेना पड़ा। बाद में विवि ने तीसरा पेपर भेजा। इसके बाद छात्रों की परीक्षा करीब तीन घंटा देरी से निपट पाई।
विवि के सिलेबस को लेकर कन्फ्यूजन ही कन्फ्यूजन
विवि के सहायक परीक्षा नियंत्रक अरुण शर्मा ने फोन पर बताया कि पेपर बनाने की खामियों की वजह से यह परेशानी आ रही है। विवि के सिलेबस को लेकर कई तरह का कनफ्यूजन है, जिन्हें दूर करने के लिए इसी महीने अहम बैठक होने जा रही है। लेकिन बैठक जब होगी तब होगी, लेकिन अभी तो छात्र परेशान हैं।
उनकी समझ में नहीं आ रहा कि जिस पेपर की पूरी तैयारी करके वह एग्जाम में बैठेंगे, वह सिलेबस से कितना आएगा और बाहर से कितना।
बोले कुलपति
यूनिवर्सिटी के सिलेबस स्ट्रक्चर की प्रॉब्लम के चलते यह परेशानी हुई है। हम स्ट्रक्चर ठीक करने का काम करने जा रहे हैं। आने वाले समय में यह परेशानी नहीं होगी।
-प्रो. पीके गर्ग, कुलपति, उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय