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इस बार भी बिना प्रश्न पत्र के परीक्षा देंगे बच्चे

Mon, 05 May 2014 05:04 AM IST
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 05 May 2014 05:04 AM IST
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examination or joke
शासनादेश के अनुसार परिषदीय स्कूलों के बच्चों को छपे प्रश्नपत्र देना अनिवार्य है लेकिन एक से आठवीं तक की सोमवार से शुरू हो रही परीक्षाएं बिना प्रश्नपत्र और बजट के शुरू हो रही हैं।
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ऐसी सूरत में एक बार फिर पुराने ढर्रे पर ही एग्जाम कराए जाएंगे। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद से ही स्कूलों में किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाता है।
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प्रदेश सरकार ने भी परीक्षाएं आदि कराने के लिए स्कूलों को बजट नहीं दिया।

ऐसे में बच्चे अपने घर से कॉपियां लाते हैं और उन्हें ब्लैक बोर्ड पर प्रश्नपत्र लिखकर एग्जाम कराए जाते हैं, जबकि शासनादेश में स्पष्ट है कि बच्चों को छपे हुए प्रश्नपत्र दिए जाएं।
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लेकिन इस बार भी बजट जारी न होने परीक्षाएं पुराने ढर्रे पर ही होंगी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपनी ओर से वार्षिक परीक्षाओं के बजट की व्यवस्था विद्यालय विकास अनुदान से खर्च करने का आदेश दिया है।

जबकि इस अनुदान की राशि स्कूलों में जुलाई-2013 में ही खर्च की जा चुकी है।

ऐसे में इस बार भी छपे प्रश्नपत्र के बगैर ही एग्जाम होंगे। सोमवार को पहले दिन हिंदी की परीक्षा होनी है।

बजट से परीक्षा खर्च की व्यवस्था करना मुश्किल

प्राथमिक स्कूल में विद्यालय विकास अनुदान के रूप में पांच और उच्च प्राथमिक स्कूलों में सात हजार रुपये मिलते हैं। यह राशि पिछले कई साल से नहीं बढ़ाई गई है।

इसके साथ ही यह राशि किन-किन मदों में खर्च की जा सकती है। इसके भी स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं।

इसमें परीक्षा के खर्च का उल्लेख नहीं है। ऐसे में परीक्षा खर्च की राशि विद्यालय विकास अनुदान से खर्च करने पर मामला ऑडिट में फंस सकता है।
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