उत्तराखंड के महाविद्यालयों में चल रही 'कक्षाएं' अवैध!
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उत्तराखंड सरकार की ओर से प्रदेश के महाविद्यालयों में प्रारंभ की गई सांध्यकालीन कक्षाएं अवैध हैं। शासन और राजभवन की ओर से इस बाबत मांगी गई विधिक राय पर उच्च शिक्षा निदेशालय ने यह रिपोर्ट भेजी है।
रिपोर्ट के मुताबिक अभी जिन परिस्थितियों में सांध्यकालीन कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है या करने की तैयारी है, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की नियमावली में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में ये कक्षाएं अवैध मानी जाएंगी।
गत वर्ष नैनीताल उच्च न्यायालय ने प्रदेश में उच्च शिक्षा के खराब स्तर पर दिए एक आदेश में महाविद्यालयों में तय सीटों से अधिक दाखिलों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद छात्रों के आगे दाखिले का संकट बढ़ा तो प्रदेश सरकार ने सांध्यकालीन कक्षाओं की शुरुआत की।
कई महाविद्यालयों में दाखिले हुए, लेकिन दून के डीएवी महाविद्यालय में कानूनी पेंच की वजह से मामला लटका रहा। इस पर शासन और राजभवन ने उच्च शिक्षा निदेशालय से विधिक राय मांगी थी। अब निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है।
यह है यूजीसी का पेंच
प्रदेश सरकार ने जो व्यवस्था बनाई थी, उसके तहत गढ़वाल मंडल के महाविद्यालयों में प्रात:कालीन कक्षाएं गढ़वाल विवि और सांध्यकालीन कक्षाएं श्रीदेव सुमन विवि के जरिये संचालित की जाएंगी।
उच्च शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यूजीसी नियमानुसार एक महाविद्यालय में एक सत्र में दो अलग-अलग विश्वविद्यालयों के एक जैसे पाठ्यक्रम संचालित नहीं किए जा सकते।
निर्णय शासन का था...
रिपोर्ट में उच्च शिक्षा निदेशालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सांध्यकालीन कक्षाओं पर लिए गए फैसले से उसका र्कोई लेना-देना नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक इस संबंध में सभी निर्णय शासन स्तर पर ही लिए गए थे।
इसलिए बढ़ी समस्या
दरअसल, गढ़वाल विवि को केंद्रीय विवि का दर्जा प्राप्त है। विवि नियमावली के अनुसार केंद्रीय विवि दर्जा मिलने के वक्त जो महाविद्यालय संबद्ध थे, वे विवि के साथ बने रहेंगे।
विवि इन्हें असंबद्ध नहीं करेगा, लेकिन नए किसी कॉलेज को संबद्ध भी नहीं कर सकेगा। ऐसे में सरकार ने सांध्यकालीन कक्षाओं का जिम्मा श्रीदेव सुमन विवि को दे दिया। इससे एक ही कॉलेज में दो-दो विवि की संबद्धता का पेंच बन गया और पूरी प्रक्रिया अवैध हो गई।
...लेकिन कुमाऊं में नहीं दिक्कत
गढ़वाल मंडल के महाविद्यालयों में भले सांध्यकालीन कक्षाएं अवैध हों, लेकिन कुमाऊं मंडल में ऐसी कोई दिक्कत नहीं होगी। दरअसल, कुमाऊं मंडल के महाविद्यालयों में प्रात:कालीन और सांध्यकालीन दोनों कक्षाओं का संचालन कुमाऊं विवि ही कर रहा है। इसलिए नियमानुसार यहां कोई परेशानी नहीं है।
हमसे इस संबंध में रिपोर्ट मांगी गई थी। हमने रिपोर्ट भेज दी है। यूजीसी के नियमानुसार सांध्यकालीन कक्षाएं संचालित नहीं की जा सकती हैं।
- डॉ. जगदीश प्रसाद, निदेशक, उच्च शिक्षा
सरकार कहां जाएं ये छह हजार?
उच्च शिक्षा निदेशालय के सांध्यकालीन कक्षाओं को अवैध करार देने के बाद छह हजार छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। प्रदेश सरकार को इस सवाल का जवाब देना भारी होगा कि गढ़वाल मंडल के राजकीय महाविद्यालयों में सांध्यकालीन कक्षाओं में दाखिला ले चुके ये छात्र अब कहां जाएंगे।
खास बात यह है कि विवि अनुदान आयोग की नियमावली के अनुसार ये छात्र अब गढ़वाल विवि से भी संबद्ध नहीं किए जा सकते। सूत्रों की मानें तो रिपोर्ट के बाद सरकार भी बैकफुट पर है।
सरकार की लापरवाही पड़ी भारी
प्रदेश सरकार ने सांध्यकालीन कक्षाओं की घोषणा तो की, लेकिन इसकी व्यावहारिक तैयारी नहीं की। सरकार ने गढ़वाल विवि से भी इस बाबत चर्चा नहीं की।
नियमानुसार गढ़वाल विवि नए कॉलेजों को संबद्धता नहीं दे सकता, लेकिन पहले से संबद्ध कालेजों में पाठ्यक्रमों की सीट जरूर बढ़ा सकता है। सरकार सांध्यकालीन कक्षाओं के बजाय विवि से सीटें बढ़ाने को कहता तो मामले का हल निकल सकता था।
अब व्यक्तिगत फार्म का ही सहारा
सांध्यकालीन कक्षाओं में दाखिला ले चुके छह हजार और दाखिला लेने की आस लगाए करीब दस हजार छात्रों के लिए अब श्रीदेव सुमन विवि से व्यक्तिगत परीक्षा देने का ही रास्ता बाकी रह गया है।
डीएवी महाविद्यालय छात्रसंघ अध्यक्ष पारस गोयल का कहना है कि डीबीएस में 240 दाखिले हो चुके हैं, जबकि डीएवी में दस हजार छात्र इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अब कक्षाएं ही नहीं चलेंगी तो व्यक्तिगत परीक्षा के लिए ही छात्रों को कहा जा रहा है। हालांकि, गोयल का कहना है कि उनका आंदोलन जारी रहेगा।