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शासन के अधिकारियों ने विवि की चिंता रद्दी में डाली
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 06 Feb 2015 12:30 PM IST
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उत्तराखंड के विवि. में सांध्यकालीन कक्षाओं के वैधानिक न होने का खुलासा होने के बाद हर दिन एक नई जानकारी सामने आ रही है।
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अब पता चला है कि गढ़वाल मंडल में सांध्यकालीन कक्षाओं का संचालन कर रहे श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय ने भी इस मसले पर शासन से राय मांगी थी। राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी के कक्षाओं की वैधानिकता पर सवाल उठाने के बाद विवि ने एक नहीं दो-दो बार शासन से कक्षाओं के संचालन पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए पूछा था।
लेकिन, शासन के अधिकारियों ने विवि की चिंता रद्दी की टोकरी में डाल दी। दूसरी ओर, सरकार ने विवि को दाखिले शुरू करने का आदेश जारी कर दिया।
पत्र मिलते ही पूछा था हल
तत्कालीन राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी ने छह जनवरी को श्रीदेव सुमन विवि को जारी पत्र में सांध्यकालीन कक्षाओं पर सवाल उठाया था।
यह भी चेतावनी दी थी कि एक ही महाविद्यालय में दो-दो विश्वविद्यालयों के समान पाठ्यक्रम संचालित हुए तो इसे अवैध मान संबंधित संस्थान, विवि पर कार्रवाई की जाएगी। विवि सूत्रों के मुताबिक यह पत्र जारी होने के अगले ही दिन विवि ने शासन से समस्या का हल पूछा था। जवाब नहीं मिला तो विवि ने कुछ दिन बाद फिर पत्र भेजा था।
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विवि ने रोकी परीक्षा प्रक्रिया
शासन ने उच्च शिक्षा निदेशालय, विश्वविद्यालय से राय लिए बिना सांध्यकालीन कक्षाएं संचालित करने का निर्णय किया, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमानुसार गलत हैं। खास बात यह है कि शासन राजभवन की आपत्ति, उच्च शिक्षा निदेशक की रिपोर्ट में वैधता पर प्रश्नचिह्न के बावजूद अब भी यह स्पष्ट नहीं कर रहा है कि कक्षाएं वैध हैं या नहीं।
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ऐसे में विवि ने गढ़वाल मंडल के महाविद्यालयों में दाखिला ले चुके 6000 छात्रों की परीक्षा आवेदन प्रक्रिया रोक दी है। अब तक इन छात्रों के परीक्षा फार्म भरे गए हैं, न ही परीक्षा और प्रायोगिक परीक्षा की कोई जानकारी दी गई है। ऐसे में छात्रों को भविष्य अंधेरे में नजर आ रहा है।
यूजीसी से ही लेते राय
सांध्यकालीन कक्षाओं के संचालन से पूर्व प्रदेश सरकार अगर एक बार विवि अनुदान आयोग से ही राय ले लेती तो इतनी फजीहत नहीं होती। पहले ही साफ हो जाता कि यूजीसी की नियमावली में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें अलग-अलग विवि एक ही महाविद्यालय में अपने पाठ्यक्रम चला सकें।
हमारा काम शासन के निर्देश के अनुरूप महाविद्यालयों को संबद्धता देना था, हमने इसे पूरा किया। अब कक्षाओं के संचालन पर जो भी निर्णय होगा, उसका पूरा पालन किया जाएगा।
- डॉ. उदय सिंह रावत, कुलपति, श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि.