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DAV में भिड़े छात्र नेता, प्रिंसिपल को बनाया 'बंदी'
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 09 Jan 2015 12:54 PM IST
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सांध्यकालीन कक्षाओं के आंदोलन के चलते राजधानी देहरादून का डीएवी महाविद्यालय अखाड़ा बन गया। गुरुवार को कुछ छात्रनेता गढ़वाल विश्वविद्यालय के परीक्षा फॉर्म जमा कराने के लिए महाविद्यालय खोलने के पक्ष में थे तो कुछ विरोध में।
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गालीगलौज के साथ हाथापाई भी
प्राचार्य कक्ष में बातचीत करने पहुंचे दोनों गुट आपस में भिड़ गए। गालीगलौज के साथ छात्रनेताओं में हाथापाई भी हुई। काफी देर हंगामे के बाद आवेदन जमा करने के लिए काउंटर खोले गए, लेकिन कुछ छात्रनेताओं ने प्राचार्य को कार्यालय में बंद कर दिया।
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शाम को प्राचार्य और छात्रनेता उच्च शिक्षा सचिव से मिलने पहुंचे। कुछ छात्रनेताओं ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। गुरुवार को महाविद्यालय खुलते ही सांध्यकालीन कक्षाओं के संचालन की मांग कर रहे छात्रनेता दोफाड़ हो गए।
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एनएसयूआई का एक गुट कॉलेज खुलवाने के पक्ष में था तो दूसरा बंद कराने के। आर्यन के कार्यकर्ता भी अलग-अलग बात करते दिखे। छात्रनेता प्राचार्य कार्यालय पहुंचे और बातचीत के दौरान खुद ही गुत्थमगुत्था हो गए।
आवेदन पत्र जमा करने का इंतजार करते रहे छात्र
इस बीच मोहन भंडारी और दो अन्य छात्रनेता महाविद्यालय बंद रखने की जिद पर अड़ गए। भारी पुलिस बल के बावजूद तीनों को हटाया नहीं जा सका। सैकड़ों छात्र परीक्षा आवेदन पत्र जमा करने का इंतजार करते रहे।
दो घंटे बाद मोहन भंडारी प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन से वार्ता करने पहुंचे और सांध्यकालीन कक्षाओं में दाखिला शुरू न होने तक भूख हड़ताल शुरू कर दी। विकास ग्रुप से पूर्व विवि प्रतिनिधि प्रभाकर भट्ट सहित कई और छात्रनेताओं ने भी भूख हड़ताल शुरू की। मोहन इससे पहले भी कई दिन की भूख हड़ताल कर चुका है।
भारी हंगामे के बाद दोपहर 12 बजे बाद महाविद्यालय खुला। प्राचार्य डा. देवेंद्र भसीन जैसे ही मुख्य नियंता कार्यालय के बगल में स्थित कक्ष में बैठे आर्यन के छात्रनेता जगबीर असवाल, भगवती प्रसाद, एनएसयूआई नेता विनीत प्रसाद भट्ट आदि ने उन्हें अपने साथ कमरे में बंद कर बाहर ताला लगा दिया।
करीब डेढ़ घंटे बाद छात्रनेता प्राचार्य को साथ लेकर सचिवालय जाने पर राजी हुए। शाम पांच बजे प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन, चुनाव निदेशक डॉ. आरके पाठक और छात्रनेता उच्च शिक्षा सचिव आरके सुधांशु से मिले। सचिव ने आश्वासन दिया कि सांध्यकालीन कक्षाओं में जल्द ही दाखिले शुरू करा दिए जाएंगे। इसके बाद छात्र लौट गए।
उधर, एनएसयूआई नेता मोहन भंडारी का कहना है कि जब तक एडमिशन शुरू नहीं होंगे, तब तक वह प्राचार्य कार्यालय में ही भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे। देर शाम तक उनकी भूख हड़ताल जारी थी।
छात्र नेता विनीत प्रसाद भट्ट का कहना है कि वह आंदोलन के साथ ही कॉलेज खुलवाने के पक्ष में हैं, क्योंकि इससे छात्रों का नुकसान नहीं होगा। गौरतलब है कि बुधवार को सीएम हरीश रावत कॉलेज में सांध्यकालीन कक्षाओं के संचालन को अपनी सहमति दे चुके हैं।
जमा होंगे परीक्षा फॉर्म
डीएवी में आखिरकार छात्रनेता भी परेशान छात्रों का गुस्सा भांप गए। गुरुवार को ज्यादातर छात्रनेता दबाव में नजर आए। छात्रसंघ अध्यक्ष पारस गोयल, महासचिव जगबीर असवाल ने कहा कि सांध्यकालीन कक्षाओं के आंदोलन की वजह से सुबह की पाली के छात्रों का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि शुक्रवार से कालेज खोला जाएगा।
...लेकिन पढ़ाएगा कौन
सांध्यकालीन कक्षाओं में दाखिलों पर मुख्यमंत्री की हां और उच्च शिक्षा सचिव के आश्वासन के बावजूद अब भी एक पेंच फंसा हुआ है। सवाल यह है कि प्रवेश शुरू भी हुए तो दाखिले कौन करेगा और कौन पढ़ाएगा। दरअसल, कॉलेज का शिक्षक संघ सांध्यकालीन कक्षाओं की किसी भी गतिविधि में हिस्सा लेने से पहले ही इनकार कर चुका है।
अशासकीय महाविद्यालयों में अब तक सांध्यकालीन कक्षाओं के लिए संविदा शिक्षक भर्ती नहीं हो पाए हैं। प्रबंधन का तर्क है कि नियुक्ति का अधिकार उन्हें है, जबकि सरकार इन पदों पर भर्ती करना चाहती है। शिक्षक न माने या नए शिक्षक भर्ती न किए गए तो प्रक्रिया अटकी रहेगी।