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मूक बधिरों के लिए मसीहा बन गए ये छात्र
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 04 Dec 2013 12:05 PM IST
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देहरादून स्थित ग्राफिक एरा विवि के छात्रों मूक बधिर लोगों से मसीहा बनकर उभरे हैं। जी, हां इन छात्रों ने एक ऐसा उपकरण व एप बनाई है जिससे मूक बधिरों के लिए बातचीत करना बेहद आसान हो जाएगा।
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इंजीनियरिंग के छात्रों ने विश्व विकलांग दिवस के मौके पर विवि में आयोजित कार्यक्रम में इसका प्रस्तुतिकरण भी दिया। तैयार उपकरण किसी भी व्यक्ति की ओर से बोले गए शब्दों को खास संकेत में बदलकर उसे समझने में बधिरों की सहायता करता है।
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स्पीच को टेक्स्ट में बदलता है
इसे हाथ पर बांधना होगा। वहीं, दूसरा मोबाइल एप स्पीच को टेक्स्ट में और टेक्स्ट को स्पीच में बदलता है। कार्यक्रम में विवि के चांसलर प्रो. आरसी जोशी ने विकलांगों को आगे बढ़ाने में सहायक तकनीक विकसित करने का आह्वान किया।
आईआईटी रुड़की की ओर से विकलांग कल्याण के लिए काम कर रही संस्था अनुश्रुति की अध्यक्ष डॉ. अनुसूया बनर्जी ने कहा कि विकलांगों के विकास में संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए लगातार नई तकनीक ईजाद की जा रही है।
मैनेजमेंट की निशुल्क शिक्षा देने की तैयारी
ग्राफिक एरा के निदेशक (शोध) डॉ. अंकुश मित्तल ने बताया कि अगले सत्र में बधिर बच्चों को बीसीए और होटल मैनेजमेंट की निशुल्क शिक्षा देने की तैयारी की जा रही है।
बीटेक के आयुष दुआ, गुंजन, आयुशी अग्रवाल और विभूति शर्मा की सांकेतिक भाषा पर आधारित वीडियो को प्रथम प्रथम पुरस्कार मिला।
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शैल गैरोला, प्रवीन और रजत गुप्ता को तीसरा पुरस्कार मिला। प्रोजेक्ट में अभिषेक जोशी और अभिषेक शर्मा को द्वितीय पुरस्कार मिला। टचवुड स्कूल को प्रभावी संदेश के लिए प्रथम पुरस्कार दिया गया।
इस मौके पर विवि कुलपति प्रो. वीके तिवारी, प्रो वाइस चांसलर प्रो. एके अवस्थी, प्रो. गौरव रहेजा आदि मौजूद रहे।
एप बनाने वाली टीम को प्रथम पुरस्कार
बीटेक चौथे वर्ष और तृतीय वर्ष के छात्र अक्षय राजपूत और नमन वत्स व दिव्यांश ने उपकरण तैयार किया है। विवि के कंप्यूटर साइंस व आईटी तृतीय वर्ष के छात्र शुभम अग्रवाल, वैभव कुकरेती और राहुल गोयल ने एप बनाया है। एप बनाने वाली टीम को प्रथम पुरस्कार दिया गया।