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लीडर बनना है तो इनकी तरह रिस्क लीजिए

Tue, 22 Oct 2013 07:21 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 22 Oct 2013 07:21 PM IST
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entrepreneuership awareness drive at dehradun

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। कुछ इसी तर्ज पर दून पहुंचे उद्योगपतियों ने भी कामयाबी का शिखर छुआ है। कॅरियर की शुरुआत किसी कंपनी में नौकरी से करने वाले यह युवा उद्यमी आज के युवाओं के लिए मिसाल हैं।

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मंदी भी नहीं डिगा सकी हौसला
मूलरूप से राजधानी देहरादून के चकराता निवासी विजेंद्र चौहान आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है। आईआईटी दिल्ली से बीटेक करने के बाद उन्होंने 1996 में कॅरियर की शुरुआत एक कंपनी में नौकरी से की। 1999 में नौकरी छोड़कर दो दोस्तों के साथ मिलकर अपनी एक कंपनी शुरू की।
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2001 में आई आर्थिक मंदी की चपेट में उनका यह सपना चकनाचूर हो गया। बावजूद इसके विजेंद्र ने हार नहीं मानी। कुछ दिन कंसलटेंट के तौर पर काम करने के बाद विजेंद्र ने दून लौटकर दोबारा सुमित अरोड़ा के साथ ‘इवोन टेक्नोलॉजीस’ की नींव रखी। अब 140 कर्मचारियों की रोजी रोटी इस कंपनी से जुड़ी है। आईटी सर्विस, मोबाइल एप्स की सर्विस देने वाली कंपनी का टर्न ओवर कुछ ही सालों में करोड़ों में पहुंच गया। विजेंद्र कंपनी के सीईओ हैं।
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15 साल नौकरी के बाद अपनी कंपनी
गुडगांव स्थित स्टॉक इमेज डाट कॉम की संस्थापक सुगंधा दूबे ने वर्ष 2008 में अपनी कंपनी स्थापित करने से पहले टाइटन, जिलेट जैसी कंपनियों में काम किया। एक फोटो वेबसाइट में भारत प्रमुख की जिम्मेदारी निभाने के बाद सुगंधा ने खुद की कंपनी तैयार करने की योजना बनाई।

सुगंधा का दावा है कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में तस्वीरें उपलब्ध कराने वाली वह देश की पहली कंपनी हैं। अकेले शुरुआत करने वाली सुगंधा की कंपनी से अब 20 कर्मचारी जुड़े हैं। उनके पास 2.5 मिलियन से ज्यादा तस्वीरों का संग्रह है। बकौल सुगंधा, जिस प्रोजेक्ट को उन्होंने तैयार किया है, वह अभी नया है लेकिन आने वाले वर्षों में यह बेहद कारगर साबित होने वाला है।

देश ही नहीं दुनिया में बजता है डंका
चंडीगढ़ स्थित ग्रे सेल टेक्नोलॉजीज एक्सपोर्ट के संस्थापक और सीईओ मुनीष कुमार का नाम आईटी की दुनिया में अदब से लिया जाता है। ओलंपिक मेडल विजेता अभिनव बिंद्रा की वेबसाइट तैयार कर चुके मुनीष ने वर्ष 2000 में पंजाब विवि से एमसीए किया।

पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने सबसे पहले अपने विवि की ऑफिशियल वेबसाइट तैयार की। इसके बाद एक बुक स्टोर के लिए भारत के पहले ऑनलाइन बुक बैंक की स्थापना की। पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ कंपनियों में नौकरी की लेकिन मन नहीं माना। 2004 में अपनी कंपनी शुरू कर दी। पहले जितना टर्न ओवर एक साल का होता था, अब इतना एक माह का होता है। मुनीष ने बताया कि 70 कर्मचारी अब उनके साथ हैं। वह विदेशों में वेबसाइट डेवलपमेंट और मोबाइल एप्स की सुविधा देते हैं।


बीकॉम पास कंपनी के मालिक
श्री अंबा इंडस्ट्रीज के संस्थापक संजीव कपूर ने दिल्ली विवि से बीकॉम करने के बाद कॅरियर की शुरुआत नौकरी से की। कई साल तक नौकरी करने के बाद वर्ष 2008 में अपनी कंपनी शुरू की। शुरुआती दौर में दुश्वारियां आईं, लेकिन हौसला नहीं हारा। इस वर्ष उनकी कंपनी ने एक करोड़ टर्न ओवर का टारगेट रखा है। संजीव का कहना है कि उन्होंने एक सपना देखा, जिसे पूरा करने के लिए खूब मेहनत की। उनकी कंपनी में दो परचेज इंचार्ज ऐसे हैं, जो कि आठवीं पास भी नहीं। संजीव के मुताबिक पढ़ाई से ज्यादा काबिलियत को तरजीह देनी चाहिए।

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