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50 कॉलेजों के स्टूडेंट क्यों हुए इनके कायल?

Tue, 02 Sep 2014 01:28 PM IST
Updated Tue, 02 Sep 2014 01:28 PM IST
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Enroll today for DUSU: special story on 10 woman president.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के डेढ़ लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स और पचास कॉलेज के छात्र 12 सितंबर को अपने प्रतिनिधि का फैसला करने वाले हैं। 3 सितंबर को नामांकन के साथ ही डीयू छात्रसंघ चुनाव की आधिकारिक शुरूआत होने वाली है।

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दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन (डीयूएसयू) का चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में बना रहता है। यहां देश के तमाम हिस्सों के छात्र पढ़ने आते हैं। इस कारण कैंपस में होने वाली राजनीतिक गतिविधि को देश में चल रही राजनीतिक रूख का संकेतक भी माना जाता है।
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इतना ही नहीं राष्ट्रीय राजनीति में हिस्सा ले रहे कई बड़े नेताओं ने यहीं से अपने राजनीतिक सफर की शुरूआत की। भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, वित्त व रक्षा मंत्री अरुण जेटली और अजय माकन जैसे नेताओं ने राजनीति का ककहरा इसी कैंपस से सीखा।
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राजनीति की चर्चा महिलाओं के योगदान के बिना अधूरी है। डीयू में अब तक 10 महिलाएं स्टूडेंट यूनियन के अध्यक्ष पद पर पहुंच चुकी हैं। हमारी इस पेशकश में जानिए कौन हैं वह युवा बालाएं और कब-कब उन्होंने पहना अध्यक्ष पद का ताज...

चुनाव ही नहीं दिल भी जीता

Enroll today for DUSU: special story on 10 woman president.

(1). अंजू सचदेवा (1989/1990) : अंजू सचदेव के डीयू की पहली महिला अध्यक्ष बनने की कहानी बेहद रोचक है। वह एबीवीपी की ओर से चुनाव लड़ना चाहती थीं लेकिन, पार्टी ने उनकी उम्मीदवारी कमजोर जानकर उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया। बाद में वह निर्दलीय चुनाव लड़ीं और एबीवीपी के प्रत्याशी को हराकर अध्यक्ष बनीं।   

(2). मोनिका अरोरा (1993/1994) : बेहद मेधावी मोनिका अरोरा ने डीयू से एमए, एमफिल और लॉ करने के बाद सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरु की। इससे पहले वह डीयू छात्रसंघ की सेक्रेटरी रहीं और अगले ही साल उन्हें डीयू स्टूडेंट यूनियन का अध्यक्ष चुना गया।  

(3). शालू ‌मलिक (1994/1995) : कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई से चुनाव जीती शालू मलिक आगे चलकर दिल्ली की राजनीति में भी भाग लिया और एमसीडी चुनावों में भागीदार बनीं।

(4). अलका लांबा (1995-1996) : ‌दिल्ली के सेंट स्टीफेंस से एमएससी करने वाली अलका ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत 1994 में एनएसयूआई से की। एक साल के बाद ही इन्होंने स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। 2003 में इन्होंने दिल्ली विधान सभा का चुनाव भी लड़ा। आप गो इंडिया फाउंडेशन नाम का एक एनजीओ भी चलाती हैं।

(5). रेखा जिंदल (1996-97) : स्टूडेंट पॉलिटिक्स से शुरुआत करने वाली रेखा गुप्ता ने अपने जल्द ही असल राजनीति में भी अपनी दखल दी। डूसू की प्रेसिडेंट बनने के बाद उन्होंने दिल्ली में पार्षद का चुनाव लड़ीं और यहां भी विजयी रहीं।

डूसू के बाद बन गई विधानसभा उम्मीदवार

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(6). ऋतू वर्मा (1999/2000) दिल्ली विश्वविद्यालय में झंडे गाड़ने के बाद ऋतु ने निगम में पार्षदी का चुनाव लड़ा। उन्हें वहां जीत हासिल हुई। कमाल की बात यह है कि यह डूसू अध्यक्ष रहते हुए ऋतु ने पार्षद का चुनाव जीता। फिलहाल वह राजनीति में बनी हुई हैं।

(7). नीतू वर्मा (2001/2002) इन्होंने भी डूसू अध्यक्ष बनने के बाद मेन स्ट्रीम पॉलिटिक्स में पार्षद बनकर शुरुआत की। यह भी ऋतु वर्मा की तरह ही डूसू अध्यक्ष रहते हुए ही पार्षद का चुनाव भी जीत गई थीं। आने वाले दिल्ली के विधानसभा चुनावों में भी वह सक्रिय भूमिका में होंगी।

(8) रागिनी नायक (2005/2006) डूसू अध्यक्ष बनने के बाद रागिनी ने सक्रिय राजनीति में आ गईं। पिछले विधानसभा चुनावों में वह जनकपुरी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की उम्मीदवार थी। वह वर्तमान में लक्ष्मीबाई कॉलेज में शिक्षक हैं। युवा ग्लैमरस चेहरा रागिनी नायक भाजपा से लगातर 4 बार विधायक रहे प्रोफेसर जगदीश मुखी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

(9) अमृता बहरी (2007/2008). इन्हीं के नेतृत्व में एनएसयूआई ने लगातार पांचवीं बार डूसू चुनावों में जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया था। तब एनएसयूआई ने क्लीन स्विप किया था और अमृता अध्यक्ष चुनी गई थीं।

(10). नुपुर शर्मा और सोनिया सप्रा (2008/09) डूसू चुनावों में नुपुर शर्मा ने एनएसयूआई की उम्मीदवार सोनिया सप्रा को हराकर पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ा था। नुपुर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की उम्मीदवार थीं। इससे पहले पांच सालों से डूसू पर कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई ने कब्जा कर रखा था। इस साल भी नुपुर के अलावा अन्य सभी पदों पर एनएसयूआई के प्रत्याशी जीते थे।

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