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इंग्लिश फोबिया से परेशान विश्वविद्यालय के छात्र
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Mon, 25 Aug 2014 04:35 PM IST
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सिर्फ सिविल सेवा परीक्षा में सी-सैट में इंग्लिश का बढ़ा प्रयोग मुसीबत नहीं है, यहां तो विश्वविद्यालयों में भी इंग्लिश बड़ी प्रॉब्लम बनकर सामने आ रही है।
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उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेज में हर साल बीटेक सहित अन्य कोर्स में इंग्लिश में पढ़ाई होने के कारण फर्स्ट सेमेस्टर में ही करीब 35 से 40 प्रतिशत स्टूडेंट्स फेल रहे रहे हैं।
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ज्यादातर इंजीनियरिंग कॉलेजों में भी इंग्लिश में ही पढ़ाई कराई जाती है। वहीं, 18 वर्ष पहले राजधानी में स्थापित बाबा भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में भी छात्रों की संख्या न बढ़ने का एक कारण इंग्लिश में पढ़ाई होना है।
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यहां किताबों से लेकर पूरी पढ़ाई इंग्लिश में ही होती है। अभी तक यहां करीब पांच हजार छात्र-छात्राएं ही पढ़ते हैं। अब तक इन यूनिवर्सिटीज में स्टूडेंट्स के सिर से इंग्लिश फोबिया निकालने के जो भी उपाय किए गए, काम नहीं आए।
अब इन विश्वविद्यालयों में हिंदी में किताबें और लेक्चर देने की व्यवस्था शुरू की गई है। यूपीटीयू से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों में ग्रामीण इलाकों के स्टूडेंट्स को बेसिक इंग्लिश समझने में भी दिक्कतें आ रही हैं।
यही कारण है कि यहां हर साल दाखिला लेने वाले स्टूडेंट्स में से करीब 40 प्रतिशत तक फर्स्ट सेमेस्टर में फेल हो जाते हैं। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स बीटेक की डिग्री हासिल नहीं कर पाते।
तकनीक की पढ़ाई में इंग्लिश के पेंच समझते हुए ही ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) ने तकनीकी पाठ्य पुस्तक पुरस्कार योजना शुरू की है।
इसके तहत हिंदी में किताबें लिखने वाले शिक्षकों व इंग्लिश से हिंदी में किताब का अनुवाद करने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। एक लाख रुपये तक पुरस्कार देने की व्यवस्था है।
यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल इस बारे में कहते हैं कि इंग्लिश में बेसिक नॉलेज तो जरूरी ही है लेकिन अगर स्टूडेंट्स को कोर्स समझ में नहीं आ रहा तो टीचर्स उन्हें हिंदी में समझाएं।
इधर, बीबीएयू में भी इंग्लिश से स्टूडेंट्स प्रॉब्लम में हैं। खुद बीबीएयू ने राजभाषा का केंद्र अपने यहां स्थापित किया है और शिक्षकों को हिंदी में किताबें लिखने और क्लासरूम में लेक्चर हिंदी में देने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बीबीएयू में इंग्लिश की प्रॉब्लम के कारण ही स्टूडेंट फेल हो रहे हैं और वह दाखिला लेने से भी कतरा रहे हैं। अब बीबीएयू अपने कार्यालयों को भी हिंदी में ही आदेश जारी करने के निर्देश दे रहा है।