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मैनेजमेंट गुरु बनने को उतावले इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Mon, 14 Oct 2013 08:53 AM IST
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) व प्रतिष्ठित बिजनेस स्कूलों में दाखिले के लिए आयोजित होने वाले कॉमन एडमिशन टेस्ट (कैट) 2013 में भी इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के छात्र-छात्राओं का दबदबा होगा।
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इस बार कुल 1.94 लाख आवेदकों में से 70 प्रतिशत आवेदक इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के ही हैं। बीते साल की तुलना में इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के अभ्यर्थियों की संख्या में 6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
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बाकी साइंस, मैनेजमेंट और इकोनॉमिक्स बैक ग्राउंड के 23 प्रतिशत छात्र-छात्राएं कैट में बैठ रहे हैं। नॉन इंजीनियरिंग छात्र-छात्राओं को आईआईएम द्वारा वेटेज देने के बावजूद इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के विद्यार्थियों का दबदबा कम नहीं हो रहा है।
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कैट 2012 में भी कैट की सर्वाधिक सीटों पर इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के स्टूडेंट्स ने ही कब्जा जमाया था। विशेषज्ञों के मुताबिक यह एक ब्रेन ड्रेन है जो कि देश की तरक्की के लिए अच्छा नहीं है।
दरअसल कैट में इंजीनियरिंग बैक ग्राउंड के छात्रों के लिए दाखिला पाना उतना कठिन नहीं होता, जितना दूसरे छात्रों का।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेकभनोलॉजी (आईआईटी) से पढ़कर निकल रहे छात्र मैनेजमेंट की डिग्री हासिल करने के लिए कैट में बैठते हैं।
कार्य अनुभव वाले छात्रों की संख्या बढ़ने के पीछे भी यही कारण है कि आईआईटी की पढ़ाई के बाद उन्हें नौकरी में उतना अच्छा पैकेज नहीं मिलता जितना आईआईएम व टॉप बिजनेस स्कूल से निकलने के बाद मिलता है।
कैट में कार्य अनुभव वाले आवेदकों की संख्या 16 प्रतिशत हो गई है, जो कि पिछले साल केवल 13 प्रतिशत ही थी। विशेषज्ञ कहते हैं कि देश में मैन पॉवर प्लॉनिंग की कमी है।
आईआईटी जैसे टॉप इंजीनियरिंग संस्थान से पढ़ाई के बाद छात्र आईआईएम की डिग्री के लिए परेशान हैं। इस समय देश में क्रीम स्टूडेंट आईआईटी से ही निकल रहे हैं। उनके लिए कैट क्रैक करना कठिन नहीं होता।
वह आराम से इस परीक्षा को पास कर लेते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इंजीनियरिंग, साइंस व मैनेजमेंट के छात्रों को अच्छे से अच्छा पैकेज दे। क्योंकि देश को सिर्फ अच्छे मैनेजर ही नहीं बल्कि इंजीनियर और वैज्ञानिक भी चाहिए।
कैट से जुड़ी कंपनी प्रोमेटिक की ओर से जारी हुए आंकड़ों के अनुसार इस बार 1.94 लाख छात्र-छात्राएं कैट में बैठेंगे। जिसमें 30 प्रतिशत संख्या छात्राओं की है। जबकि पिछले साल 27 प्रतिशत छात्राओं ने कैट दिया था।
16 अक्तूबर से शुरू होंगे टेस्ट
कैट का काउंट डाउन शुरू हो गया है। 16 अक्टूबर से 11 नवंबर तक कैट का आयोजन किया जाएगा। यह कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट होगा। इसके लिए अब तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
कैट के समन्वयक प्रो. रोहित कपूर के अनुसार स्टूडेंट्स को किसी भी तरह की दिक्कत न हो इसके लिए पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। किसी भी तरह की तकनीकी गड़बड़ी न हो इसके लिए हम पूरी तरह अलर्ट हैं।
40 शहरों में होगी कैट, लखनऊ में दो केन्द्र
कैट के लिए देश भर के 40 शहरों में परीक्षा केन्द्र बनाए गए हैं। राजधानी लखनऊ में दो परीक्षा केन्द्र हैं। इसमें डॉ. एमसी सक्सेना ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट दुबग्गा और सूर्या ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट मोहनलालगंज शामिल है।
परीक्षा केन्द्र पर अभ्यर्थी को डेढ़ घंटे पहले पहुंचना होगा। जिन अभ्यर्थियों को सुबह 10 बजे परीक्षा के लिए बुलाया गया है उन्हें परीक्षा केन्द्र पर 8:30 बजे पहुंचना होगा।
जिन्हें दूसरे सेशन में दोपहर 3:15 बजे पहुंचना है उन्हें परीक्षा केन्द्र पर दोपहर 1:45 बजे रिपोर्टिंग करनी होगी।