फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Eighty two percent seats are empty in B tech.

यूपीटीयू : खाली रह गईं बीटेक की 82 फीसदी सीटें

Mon, 10 Aug 2015 02:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 10 Aug 2015 02:50 AM IST
विज्ञापन
Eighty two percent seats are empty in B tech.

राट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) ही नहीं बीटेक कोर्स की बाकी जगह भी स्थिति अच्छी नहीं है। उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक का हाल तो और भी बुरा है। पांच चरण की काउंसलिंग के बाद बीटेक की 82 फीसदी सीटों पर  स्टूडेंट्स ही नहीं मिल पाए हैं।

विज्ञापन


यूपीटीयू में बीटेक की कुल 1,42,319 सीट पर अभी तक केवल 26 हजार स्टूडेंट्स ने ही दाखिला लिया है। खाली सीटें भरने के लिए यूपीटीयू अंतिम चरण की अतिरिक्त काउंसलिंग भी करा रहा है। काउंसलिंग में करीब नौ हजार अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। ये सभी दाखिला ले भी लें तो खाली सीटों का आंकड़ा 76 फीसदी से नीचे नहीं आएगा।
विज्ञापन


देश के प्रतिष्ठित 31 एनआईटी में इस साल बीटेक पाठ्यक्रम में 1541 सीटें खाली बच गई हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में दाखिला न मिलने की सूरत में एनआईटी दाखिले के लिए स्टूडेंट्स की हमेशा से पहली पसंद रहे हैं। इस साल आईआईटी में पहले चरण में सीटें खाली बची थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


एनआईटी में भी सीटें खाली रहने से बीटेक के प्रति स्टूडेंट्स का क्रेज कम होने की बात जाहिर होती है। यूपीटीयू का हाल तो इन दोनों से बहुत ही बुरा है। यूपीएसईई में इस साल 1,94,356 अभ्यर्थी सफल हुए हैं। डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करवाकर काउंसलिंग में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या महज 57,250 है।

काउंसलिंग में शामिल होने के बावजूद आधे ने दाखिला नहीं लिया है। यूपीटीयू की सीटें खाली होने का कारण जानकार पढ़ाई की गिरती गुणवत्ता को ठहराते हैं। गुणवत्ता खराब होने की वजह से छात्रों को रोजगार नहीं मिलता। इसी वजह से युवा बीटेक में चार साल बर्बाद करने के बजाय अन्य रोजगारपरक कोर्सेज में हाथ आजमा रहे हैं।

सीधे दाखिले में दिखाते हैं रुचि

Eighty two percent seats are empty in B tech.

यूपीटीयू के कॉलेजों में काउंसलिंग के बजाय सीधे दाखिले में यकीन रखते हैं। बीते साल के अनुभव बताते हैं कि प्रवेश परीक्षा में सफल होेने के बावजूद अभ्यर्थी निजी कॉलेजों में दाखिला नहीं लेते हैं। वहीं, जब सीधे दाखिला का नंबर आता है तो काफी सीटें भर जाती हैं। बीते साल एसईई में 1,86,231 अभ्यर्थी सफल हुए थे।

इसमें से करीब 70 हजार ने अपने डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन कराए थे। इसके बाद बीटेक पाठ्यक्रम में 25 हजार अभ्यर्थियों ने काउंसिलिंग के माध्यम से दाखिला लिया था। जबकि सीधे दाखिले में सवा लाख सीटें भर गईं। इस साल 11 अगस्त से 14 अगस्त तक कॉलेजों को सीधे दाखिले का मौका दिया जाएगा।

काउंसलिंग में देरी मुख्य वजह

यूपीटीयू के कुलपति प्रो.विनय पाठक का कहना है कि यूपी ही नहीं पूरे देश में इंजीनियरिंग की सीटें खाली बच रही हैं। जहां तक यूपीटीयू का सवाल है तो हमारे यहां काउंसलिंग काफी देर से शुरू हो रही है। जबकि बाकी जगह कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। दूसरा सबसे बड़ा कारण डिमांड और सप्लाई में अंतर है।

इंडस्ट्री में जितने युवाओं की जरूरत है उससे ज्यादा हर साल बीटेक डिग्री होल्डर हम तैयार कर रहे हैं। क्वालिटी अच्छी न होना भी एक बड़ी वजह है। इस साल से हम एग्जाम सिस्टम दुरुस्त करेंगे। ताकि सही समय पर एडमिशन हो सकें। इसके साथ ही हम लोगों से सुधार के लिए सुझाव भी मांगेंगे ताकि बीटेक के प्रति छात्रों का क्रेज बरकरार रह सके।

पूर्व कुलपति प्रो. ओंकार सिंह का कहना है कि काउंसलिंग में सीटें न भरने की मुख्य वजह गुणवत्ता अच्छी न होना है। अभ्यर्थी यूपीटीयू के संस्थानों के प्रति आकर्षित हों इसके लिए सिलेबस में बदलाव के साथ ही शिक्षण, परीक्षा और शोध की स्थिति सुधारने की जरूरत है। जब तक इस दिशा में काम नहीं होगा बीटेक की दशा में सुधार नहीं होगा। युवाओं को जब लगेगा कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के बाद रोजगार भी मिलेगा तो निश्चित ही वे बीटेक के प्रति आकर्षित होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed