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उत्तराखंड में डेढ़ दशक में घट गए एक लाख छात्र

Wed, 04 Nov 2015 01:35 PM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून Updated Wed, 04 Nov 2015 01:35 PM IST
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education level in uttarakhand.

उत्तराखंड गठन के बाद सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधरने के बजाए बिगड़ती चली गई। घटती छात्रों की संख्या के चलते स्कूल खाली और खंडहर होते चले जा रहे हैं।

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पिछले डेढ़ दशक में एक लाख से अधिक छात्र कम हुए हैं। 300 से अधिक स्कूल बंद हो चुके हैं, वहीं 1800 स्कूल अब बंदी की कगार पर हैं। यह हाल तब है जबकि इन स्कूलों के लिए सरकार की ओर से करोड़ों रुपये की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
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शिक्षा विभाग में राज्य गठन के बाद विभागीय अधिकारियों की फौज बढ़ी, लेकिन स्कूलों में छात्रों की संख्या तेजी से घटती चली गई। इन स्कूलों से छात्र जिस तेजी से घट रहे हैं, इससे सरकार को भी हर ब्लॉक में मॉडल विद्यालय के अभिनव प्रयोग के बारे में सोचना पड़ा है।
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स्थिति यह है कि राज्य गठन से पहले निदेशक बेसिक और माध्यमिक हुआ करते थे, इनके साथ गिने-चुने कुछ अधिकारी थे। अब विभाग में तीन निदेशक और इनके साथ 226 से अधिक अफसरों की पूरी फौज है। वहीं सरकारी स्कूलों के लिए सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान, बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना सहित कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।


इसके बावजूद प्राथमिक, जूनियर हाईस्कूलों और माध्यमिक में पिछले डेढ़ दशक के भीतर एक लाख से अधिक छात्र कम हुए हैं। इसमें 1800 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जिनमें छात्र संख्या 10 या फिर इससे भी कम रह गई है। यही वजहें रही कि विभाग को शिक्षकों के 2600 पद समाप्त करने पड़े।

तेजी से खाली हो रहे स्कूल
- प्रदेश में 17,642 सरकारी स्कूल हैं। इसमें से 12,410 प्राथमिक विद्यालयों में चार लाख 74 हजार बच्चे हैं। जूनियर हाईस्कूलों में तीन लाख 45 हजार बच्चे हैं। पिछले डेढ़ दशक में इन विद्यालयों में एक लाख से अधिक छात्र कम हुए हैं।

ये हैं प्रमुख वजहें
- स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव।
- पहाड़ के दूरदराज के स्कूलों में शिक्षकों की कमी।
- पहाड़ के स्कूल छोड़ शिक्षकों की दून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की दौड़।
- शिक्षण कार्य के बजाए शिक्षकों की अन्य कार्य में ड्यूटी।
- शिक्षकों के प्रशिक्षण का अभाव।

ऐसे सुधर सकती है स्थिति
- सभी स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता।
- स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं।
- अंग्रेजी माध्यम से स्कूलों में पठन-पाठन शुरू कर शिक्षकों को अन्य ड्यूटी से मुक्त रखना।
- भवनों की स्थिति में सुधार।

हमारे स्कूल भवन जर्जर हाल हैं, इन्हें ठीक कर आकर्षक बनाना होगा। हमारे शिक्षक पब्लिक स्कूलों के शिक्षकों से उच्च शिक्षित एवं प्रशिक्षित हैं।
- सीमा जौनसारी, शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा

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