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एचपीयू ईसी चुनाव में अड़ंगा बनेगी ये बड़ी वजह
ब्यूरो/ अमर उजाला,शिमला
Updated Wed, 05 Nov 2014 12:37 PM IST
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प्रदेश विश्वविद्यालय कार्यकारी परिषद और विवि कोर्ट सदस्य के लिए कर्मचारियों में से नुमाइंदा चुने जाने के लिए चुनाव होने हैं। लेकिन परिसर में धारा 144 लागू है।
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अब सवाल यह है कि चुनाव परिसर में धारा-144 होने पर चुनाव करना क्या संभव है? कर्मचारियों के इन चुनाव में प्रचार प्रसार भी होगा। चुनावी रणनीति बनाने को बैठकें होंगी और मतदान के रोज 868 से अधिक कर्मचारी एकत्र होकर मतदान करेंगे। धारा 144 के बीच कर्मचारियों के लिए चुनाव प्रचार कर पाना मुश्किल है।
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विश्वविद्यालय प्रशासन हालांकि बीस नवंबर तक चुनाव करवाने की तैयारी में है लेकिन इससे पूर्व प्रशासन को परिसर से धारा 144 हटाने पर विचार करना ही पड़ेगा। चुनाव होंगे, तो परिसर में कर्मचारी प्रचार अभियान पर ग्रुप में ही निकलेंगे। रात रात भर कर्मचारी प्रचार अभियान को लेकर बैठकें भी करेंगे। यह सब धारा 144 के बीच नहीं हो सकता।
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धारा 144 के मुताबिक लोग ग्रुप में नहीं निकल सकते न ही किसी तरह का प्रचार कर सकते हैं। यह धारा परिसर में छात्रों में आपसी झड़प होने की संभावनाओं को कम करने को लेकर लागू की है।
प्रदेश विवि में पूर्व में शिक्षकों के दो अलग-अलग संघ भी पहले समर्थित कहे जाते रहे। लेकिन अब शिक्षकों ने अपने-अपने संघ के अलग नाम रखे हैं। इसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (हपुटा) और प्रदेश विवि शिक्षक कल्याण संघ (हपुटवा) है।
विवि के कुलसचिव प्रो. मोहन झारटा ने कहा कि ईसी और कोर्ट सदस्य चुनाव का शेडयूल तैयार किया जा रहा है। जल्द इसे जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने माना कि धारा 144 पर भी विचार किया जा रहा है।
अब कर्मचारियों के चुनाव में तीन गुट आमने-सामने होंगे। प्रदेश विश्वविद्यालय के इन चुनावों में उतरने वाले तीनों गुट अलग-अलग विचारधारा से संबद्ध पैनल को अपने संघों का अलग से नामकरण भी करना पड़ सकता है। प्रशासन, कर्मचारी गुटों का कांग्रेस, भाजपा और माकपा समर्थित कहे जाने पर आपत्ति जताने लगा है।