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डीयू: पहले ही दिन कॉलेजों की मनमानी से छात्र परेशान

Wed, 02 Jul 2014 11:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 02 Jul 2014 11:56 AM IST
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DU admission, colleges are making rules of their own

दिल्ली विवि में एफवाईयूपी खत्म होने के साथ कॉमन क्राइटेरिया की वापसी हो गई तो कॉलेजों के अतिरिक्त योग्यता मानक एक बार फिर से लागू हो गए।

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कॉलेजों के अतिरिक्त योग्यता मानकों का असर यह रहा कि दाखिला प्रक्रिया के पहले दिन ही कॉलेजों की मनमानी से परेशान छात्र दाखिले के लिए भटकते रहे। इतना ही नहीं इसके लिए छात्रों ने डीन स्टूडेंट वेलफेयर के भी खूब चक्कर लगाए।
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किसी को कॉलेज नियमों ने तो किसी को मूल अंक तालिका तो किसी को गैप ईयर के कारण कॉलेज से डीन स्टूडेंट वेलफेयर कार्यालय दौड़ना पड़ा।

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बिहार से दाखिला लेने के लिए पहुंचे छात्र ने बताया कि उन्होंने हिंदू कॉलेज में आवेदन किया। छात्रों के पास अंक तालिका की मूल कॉपी नहीं है। ऐसे में वह इंटरनेट से अंक तालिका लेकर पहुंचे तो कॉलेज दाखिले से मना कर रहे हैं। काफी संख्या में यह शिकायत लेकर डीन स्टूडेंट वेलफेयर पहुंचते रहे।


वहीं, रामजस कॉलेज में दाखिले के लिए पहुंचे एक छात्र ने बताया कि उसका नंबर बीए ऑनर्स इतिहास में आ गया है, लेकिन उसने बेस्ट फोर में फिजिकिल एजुकेशन के नंबर को भरा था। लेकिन कॉलेज ने फिलहाल यह कहकर दाखिले से इनकार कर दिया कि फिजिकल एजुकेशन को एकेडमिक विषय के तौर पर देखें या नहीं इसको लेकर कुछ तकनीकी पहलू देखे जा रहे हैं।

वहीं, कुछ छात्रों को दस्तावेज सत्यापन कराने को कहा गया जबकि यह जरूरी नहीं है। श्यामलाल कॉलेज से आए एक छात्र ने बताया कि उसे केवल इसलिए दाखिला नहीं दिया गया क्योंकि वह गैप ईयर का छात्र है। उसने यह डीन छात्र कल्याण कार्यालय आकर बताया कि कह रहे हैं कि वर्ष 2013 में पास हुए हैं इसलिए कार्यालय से लिखाकर लाइए।

दौलतराम कॉलेज में हिंदी ऑनर्स में दाखिले के लिए आई एक छात्रा ने बताया कि कटऑफ के मुताबिक 87 फीसदी अंक हैं, लेकिन कॉलेज की ओर से कहा गया कि हिंदी कोर में भी कम से कम 85 फीसदी अंक होने चाहिए।

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