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पीएचडी के लिए अब नहीं होगी परीक्षा
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 17 Jan 2014 04:47 PM IST
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दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पीएचडी प्रोग्राम में लिखित प्रवेश परीक्षा नहीं होगी, बल्कि इंटरव्यू के आधार पर दाखिले होंगे।
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विवि ने पीएचडी की फीस को कम करने का फैसला लिया है। साथ ही इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की डयूल डिग्री कोर्स में दाखिला लेने वाले छात्रों को तीसरे सत्र में एमबीए की पढ़ाई छोड़ने का अधिकार भी दे दिया है।
विवि की एकैडमिक काउंसिल की बैठक में यह फैसला लिया गया। कुलपति प्रो. पीबी शर्मा के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2014-15 में नए नियमों के तहत दाखिले होंगे। अब पीएचडी में लिखित प्रवेश परीक्षा नहीं होगी, बल्कि इंटरव्यू के आधार पर दाखिले लिए जाएंगे। छात्रों को पहले वर्ष तीस हजार और प्रति वर्ष 10-10 हजार रुपये की फीस देनी होगी।
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इससे पहले छात्रों को प्रति वर्ष 30-30 हजार रुपये देने होते थे। डीटीयू के पीएचडी स्कॉलरशिप प्रोग्राम में इंडस्ट्री से संबंधित व्यक्ति, जिसके पास तीन साल का अनुभव होगा, दाखिले के लिए आवेदन भर सकता है। डीटीयू नए सत्र से पीएचडी स्कॉलरशिप सीट को ओपन करने जा रहा है।
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वहीं विवि ने छात्रों की मांग के चलते ही काउंसिल ने इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट की ड्यूल डिग्री में छात्रों को तीसरे सत्र में एमबीए की पढ़ाई छोड़ने का अधिकार दे दिया है। दरअसल छात्रों की कहना था कि यदि बीटेक में तीसरे सत्र के दौरान उनकी प्लेसमेंट हो जाती है तो फिर वे एमबीए डिग्री के चलते नौकरी ज्वाइन नहीं कर पाएंगे।
छात्रों की इसी दिक्कत को समझते हुए प्रबंधन ने तीसरे सत्र में एमबीए डिग्री छोड़ने का अधिकार (एग्जिट ऑप्शन) दिया है। अहम है कि देश में पहली बार डीटीयू बीटेक और एमबीए ड्यूल डिग्री शुरू की थी। कुलपति के अनुसार, एमटेक के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में रोबोटिक्स एंड मशीन डिजाइन नया प्रोग्राम जुड़ने जा रहा है, जिसमें 18 फुल टाइम तो पांच स्पॉन्सर्ड सीट होंगी।
प्रोफेसर गर्ग बने प्रो वीसी
विवि के प्लसेमेंट हेड प्रो. एसके गर्ग को प्रो वाइस चांसलर नियुक्त किया गया है। वह इससे पहले एमबीए डिग्री प्रोग्राम के हेड के अलावा कई अन्य पदों पर भी तैनात रहे हैं।