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DTU के दो छात्रों को मिला 73 लाख का पैकेज

Thu, 18 Sep 2014 03:07 PM IST
Updated Thu, 18 Sep 2014 03:07 PM IST
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DTU 2 engineers get 73 lakh each annual package.

दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (डीटीयू) के दो छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट के दौरान 73-73 लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर हुआ है।

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कैंपस प्लेसमेंट के दौरान बीटेक कंप्यूटर इंजीनियरिंग के आखिरी सत्र के छात्र अपूर्व जिंदल और अक्षित गुप्ता का चयन अमेरिका की ईपीआईसी कंपनी ने किया। यह कंपनी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी हुई है।

गौरतलब है कि डीटीयू में पिछले साल इसी कंपनी ने 93 लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर किया था। दरअसल, डीटीयू में पिछले एक महीने से जारी कैंपस प्लेसमेंट के दौरान लगभग 50 से अधिक विदेशी कंपनियां पहुंची हैं।
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अभी तक 300 से ज्यादा छात्रों को ऑफर लेटर जारी किए जा चुके हैं। कैंपस पहुंची विदेशी कंपनियों ने इस बार छात्रों को 40 से 45 लाख रुपये का पैकैज भी ऑफर किए हैं।

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कौन हैं इन दोनों की सफलता का कारण?

DTU 2 engineers get 73 lakh each annual package.

मां की प्रेरणा से आगे बढ़ा: अपूर्व
अशोक विहार निवासी अपूर्व जिंदल सफलता का श्रेय अपनी मां को देते हैं। अपूर्व के पिता दिल्ली जल बोर्ड में इंजीनियर हैं। जबकि मां दिल्ली सरकार के सर्वोदय विद्यालय में शिक्षिका हैं। मां का सपना था कि बेटा सफल इंजीनियर बनें। अपूर्व ने कहा कि मां के सपने का पूरा करने पर उसे गर्व महसूस हो रहा है। अहम है कि एमेजान ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी में इंटर्नशिप के बाद ही उन्हें 25 लाख रुपये सालाना का पैकेज ऑफर हुआ था। लेकिन वह कैंपस प्लेसमेंट में इस कंपनी के आने का इंतजार कर रहे था।

भाई समेत लेरी पेज को माना आदर्श: अक्षित
ग्रीन पार्क निवासी अक्षित गुप्ता अपने बड़े भाई अनीश और गूगल के संस्थापक लेरी पेज को अपना आदर्श मानते हैं। अक्षित के पिता स्टॉक ब्रोकर रहे हैं। जबकि मां नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में प्रोफेसर हैं। अक्षित को प्लेसमेंट से पहले अच्छा पैकेज मिलने की उम्मीद थी। हालांकि ऐसे पैकेज से शुरुआत के बारे में उन्होंने सोचा नहीं था। उन्होंने कहा कि परिवार और शिक्षकों के मार्गदर्शन की वजह से यह कामयाबी मिली। प्लेसमेंट इंटरव्यू व परीक्षा देने के दो हफ्ते तक कोई जवाब नहीं आने पर उन्होंने फाइनल परीक्षा की तैयारियां शुरू कर दी थी। सोमवार शाम कंपनी की ओर से सेलेक्शन का फोन आया तो उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ, बस आंखों से खुशी के आंसू बह निकले।

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