लखनऊ विश्वविद्यालय तैयार करेगा अनुपम व नसीर जैसे कलाकार
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शिक्षा, विज्ञान, सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिभाएं देने के बाद अब लखनऊ विश्वविद्यालय थियेटर और फिल्म के क्षेत्र में अनुपम खेर और नसीरूद्दीन सरीखे कलाकार देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए विवि में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) के सहयोग से कोर्स संचालित करने की तैयारी चल रही है। अक्तूबर में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा, दिल्ली के निदेशक प्रो. वामन एलयू आएंगे।
इस दौरान वह यहां दो दिन की कार्यशाला में ड्रामा और एक्टिंग के क्षेत्र की बारीकियों से रूबरू कराएंगे। इसी दौरान विवि उनके साथ एलयू में एनएसडी के सहयोग से कोर्स चलाने की योजना को अमली जामा पहनाने की योजना पर काम आगे बढ़ाएगा। मालूम हो कि एनएसडी ने अनुपम खेर, नसीरुद्दीन शाह, पंकज कपूर, ओम पुरी, राज बब्बर समेत कई नामी कलाकार बॉलीवुड को दिए हैं।
लविवि के कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने बताया कि राजधानी से निकलकर बहुत से कलाकारों ने बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रदेश सरकार ने भी यहां फिल्म सिटी बनाने, फिल्मों को सब्सिडी देने की शुरूआत की है। ऐसे में यदि यहां एनएसडी के सहयोग से ड्रामा से जुड़े कोर्स शुरू होंगे तो काफी लाभ मिलेगा।
‘अमर उजाला’ से बातचीत में प्रो. निमसे ने बताया कि एनएसडी के निदेशक प्रो. वामन को विशेष आग्रह पर अक्तूबर में यहां दो दिवसीय कार्यशाला के लिए बुलाया गया है। तब तक एलयू भी इस कोर्स को शुरू करने केलिए अपनी बाकी तैयारी करता रहेगा। प्रो. वामन केआने पर इस योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
एनएसडी में क्लासिकल इंडियन ड्रामा, वर्ल्ड ड्रामा, थियेटर म्यूजिक, एक्टिंग, थियेटर आर्किटेक्चर, स्टेज टेक्नोलॉजी, कॉस्ट्यूम डिजाइन, स्टेज लाइटिंग, प्रोडक्शन प्रोसेस की बारीकियां सिखाई जाती हैं।
एनएसडी डिजाइन करेगा कोर्स
एलयू में जो कोर्स चलाया जाएगा उसमें इन चीजों का समावेश किया जाएगा। हालांकि यहां के लिए कोर्स को एनएसडी द्वारा ही डिजाइन किया जाएगा। इस क्षेत्र में जाने की चाह रखने वाले जो लोग अभी एनएसडी जाते हैं उनको राजधानी में ही प्लेटफार्म मिल जाएगा।
कॉलेजों में भी होंगी सांस्कृति की की प्रतियोगिताएं
एनएसडी के सहयोग से कोर्स शुरू करने के अलावा एलयू अपने यहां सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए और भी कई योजनाएं तैयार कर रहा है। प्रो. निमसे ने बताया कि विवि व सभी शिक्षण संस्थानों का उद्देश्य केवल पढ़ाना नहीं बल्कि छात्र-छात्राओं का सर्वांगीण विकास करना होता है। इसमें कला की अहम भूमिका है।
उन्होंने बताया कि विवि की सांस्कृतिक संस्था सांस्कृतिकी द्वारा होने वाले वार्षिक कार्यक्रमों में अब एलयू से संबद्घ डिग्री कॉलेजों की भूमिका को और बढ़ाया जाएगा। इसके लिए सांस्कृतिकी में होने वाली प्रतियोगिताओं को केवल विवि में ही नहीं बल्किकॉलेजों में भी कराया जाएगा। जैसे नृत्य की प्रतियोगिता एक कॉलेज में, गायन की अलग कॉलेज में तो एलयू में कोई अलग प्रतियोगिता।
हालांकि कॉलेजों में जो प्रतियोगिताएं होंगी उनका खर्च और तैयारी भी विवि ही कराएगा। इन सभी प्रतियोगिताओं में एलयू केसाथ ही कॉलेज के छात्र-छात्राएं भी हिस्सा लेंगे। सांस्कृतिकी बोर्ड के निदेशक प्रो. एनके पांडेय ने बताया कि इस साल पहली बार विवि में सांस्कृतिकी का कैलेंडर भी तैयार किया गया है।
इसमें कब कौन सी सांस्कृतिक प्रतियोगिता या गतिविधि होनी है इसकी जानकारी है। एक-दो दिन में ये कैलेंडर एलयू की वेबसाइट पर अपलोड करा दिया जाएगा।