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आठवीं कक्षा में देखा स्कूल और दसवीं में कर दिया ध्ामाल
शैलेश्ा अरोड़ा/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Wed, 21 May 2014 02:35 AM IST
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वो चल नहीं सकती लेकिन जज्बा आसमान छूने का है। व्हील चेयर पर रहकर भी वह अपने साथ के सामान्य स्टूडेंट्स को पढ़ाई में टक्कर देती है।
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रिजर्व पुलिस लाइंस स्थित पुलिस मॉर्डन स्कूल की छात्रा प्रिया श्रीवास्तव ने 100 फीसदी विकलांगता के बाद भी सीबीएसई 10वीं की परीक्षा में 9 सीजीपीए लाकर यह साबित कर दिया कि हौसलों से उड़ान होती।
प्रिया का सपना फैशन डिजाइनर बनने का है। इनके पिता मधुरकांत श्रीवास्तव हाईकोर्ट इलाहाबाद की लखनऊ बेंच में अधिवक्ता हैं।
जबकि मां रीना सक्सेना डीआरएम ऑफिस में एसएसओ के पद पर कार्यरत हैं। प्रिया मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नाम की लाइलाज बीमार से ग्रसित है।
वह कभी भी व्हील चेयर से नहीं उठ सकती। प्रिया के सिर्फ हाथ चलते हैं। स्कूल की प्रधानाचार्या एसएस रिजवी भी प्रिया की कामयाबी से बहुत खुश हैं।
उन्होंने कहा कि वे बता नहीं सकती कि उन्हें कितनी खुशी हो रही है। जिस लड़की को उन्होंने आगे बढ़ने का मौका दिया उसने स्कूल का नाम रौशन कर दिया। प्रिया की बड़ी बहन पल्लवी इंजीनियरिंग करने के बाद मुंबई में कार्यरत है।
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कक्षा आठवीं में देखा पहली बार स्कूल
प्रिया के पिता मधुरकांत ने बताया कि वह जब डेढ़ वर्ष की थी तभी इस बीमारी का पता चला। बंगलुरू में लंबे समय तक इलाज कराया।
लेकिन अंत में डॉक्टरों ने साफ कह दिया कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं। डॉक्टरों ने तो यहां तक कह दिया कि इस बीमारी से पीड़ित मरीज 12 साल की उम्र के बाद कम ही सर्वाइव कर पाते हैं।
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मधुरकांत के कुछ परिचितों ने यह जानने के बाद कहा कि वे प्रिया को न पढ़ाएं। लेकिन इन लोगों ने किसी की बातों पर ध्यान नहीं दिया।
ढाई साल की उम्र में ही प्रिया के लिए घर में दो टीचर लगवाए गए। उसकी शुरुआती पढ़ाई घर पर ही चलती रही। लेकिन प्रिया भी बाकी बच्चों की तरह की स्कूल जाना चाहती थी।
उसकी इच्छा जानने के बाद मधुरकांत व रीना ने शहर के कई स्कूलों में उसका प्रवेश कराने के लिए प्रयास किया। लेकिन सभी जगह प्रिया की बीमारी की वजह से प्रवेश देने से मना कर दिया जाता।
आखिर में माता-पिता उसे लेकर पुलिस लाइंस स्थित पुलिस मॉडर्न स्कूल पहुंचे। यहां प्रिया को कक्षा आठवीं में प्रवेश मिला। तब से प्रिया यहीं पढ़ रही है। अब तो प्रिया का यहां बहुत बड़ा फ्रेंड सर्किल है।
फैशन डिजाइनर बनने का सपना
अपनी सफलता से खुश प्रिया का सपना निफ्ट से पढ़ाई करके फैशन डिजाइनर बनकर ज्वैलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र में जाना है।
घर पर खाली समय में वह ज्वैलरी डिजाइन भी करती है। इतना ही नहीं वह व्हील चेयर पर बैठे हुए ही लैपटॉप पर अपने पिता मधुरकांत के वकालत के काम में भी सहयोग करती है।
उनके किसी केस की इंटरनेट से डिटेल जुटानी हो या कोई जजमेंट ऑर्डर निकालना हो। खाली समय में वह अपनी मां को लैपटॉप पर प्रेजेंटेशन बनाना और बचपन से उसकी देखभाल करने वाली राधा को अंग्रेजी लिखना और पढ़ना सिखाती है।