{"_id":"358c20a9cf8ddf123a5f21a7502453ce","slug":"dispute-on-doon-university-new-name","type":"story","status":"publish","title_hn":"दून विवि के नए नाम को लेकर छात्रों में गुस्सा","category":{"title":"Campus Archives","title_hn":"कैंपस आर्काइव","slug":"campus-archives"}}
दून विवि के नए नाम को लेकर छात्रों में गुस्सा
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 04 Mar 2014 12:44 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड सरकार ने हाल ही में दून विश्वविद्यालय का नाम बदलकर महर्षि वाल्मीकि विश्वविद्यालय कर दिया है।
विज्ञापन
पढ़ें, अब जाकर रामनगर में शांत हुई फेसबुक की 'आग'
इस फैसले के साथ यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या नाम बदलने से लड़खड़ाती उच्च शिक्षा का भला हो पाएगा। क्या विश्वविद्यालय स्थापना के एक भी उद्देश्य को हासिल कर पाया है। इन सवालों पर पड़ताल का नतीजा बेहद निराशाजनक है।
विज्ञापन
विवि. में 2008 से शुरू हुआ शिक्षण कार्य
जवाब यह है कि यहां छात्र-छात्राओं की संख्या तो तेजी से बढ़ी है लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ हासिल नहीं हुआ। वर्ष 2005 में राज्य सरकार के एक्ट से बनी दून यूनिवर्सिटी में 2008 से शिक्षण कार्य प्रारंभ हुआ।
विज्ञापन
पढ़ें, 'गिनीज बुक में नाम दर्ज करवाने की ओर बढ़े रावत'
विवि में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, स्कूल ऑफ लैंग्वेज, स्कूल ऑफ कम्यूनिकेशन, स्कूल ऑफ सोशल साइंस और स्कूल ऑफ एनवायरमेंटल साइंस की स्थापना कर अलग-अलग कोर्स शुरू किए गए। वर्तमान हालात यह हैं कि विवि में एक अदद लाइब्रेरी तक नहीं बन पाई है।
छात्र किताबों के लिए इधर से उधर भटकते हैं। कुलपति का आवास ही नहीं मुख्य प्रशासनिक भवन भी नहीं मिल पाया है। विवि केवल कुलपति, कुलसचिव और उपकुलसचिव के भरोसे चल रहा है।
पढ़ें, 'आपदा के दौरान बाप-बेटे का नहीं था': जनरल चैत
विवि में छात्र संख्या 700 है और पढ़ाने वाले रेगुलर शिक्षक केवल 23। विवि में शिक्षणकार्य जैसे तैसे 24 संविदा शिक्षकों के भरोसे चल रहा है। नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी कई महीनों से अधर में है।
शहर के नाम से है पहचान
दिल्ली विवि, कोलकाता विवि, बांबे विवि जैसे तमाम विश्वविद्यालयों की पहचान शहर और उनके अकादमिक रिकॉर्ड से है। दून विवि का नाम बदलने से क्या असर पड़ेगा, इस सवाल का जवाब अभी किसी के पास नहीं है।
जमीन का भी ठिकाना नहीं
दून विवि के लिए केदारपुरम के अलावा सहसपुर की तरफ भी जमीन दी गई थी। लेकिन नौ वर्षों में उस जमीन पर एक ईंट भी नहीं रखी गई।
पढ़ें, कैलास मानसरोवर यात्रा के बारे में जानें सबकुछ
बताया जा रहा है कि सरकार ने सहसपुर की जमीन विवि से वापस ले ली थी। इस विवि की स्थापना जेएनयू दिल्ली विवि की तर्ज पर किए जाने की योजना थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया।
राजनीति की बू
दून विश्वविद्यालय का नाम बदलने में राजनीति की बू आ रही है। कहा जा रहा है कि लोकसभा और पंचायत चुनाव से पहले एक समुदाय विशेष को खुश करने के लिए यह फैसला लिया गया है।
छात्र उतरे विरोध में, जमकर किया हंगामा
दून विवि के नाम में बदलाव के विरोध में विवि के छात्र खुलकर सामने आ गए हैं। छात्रों ने सोमवार को विवि में जमकर प्रदर्शन किया और इसके बाद विधानसभा तक रैली निकाली।
विवि का नाम न बदलने की मांग
छात्रों ने मंगलवार से विवि परिसर में पांच दिवसीय धरना शुरू करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन में विवि के पूर्व और वर्तमान छात्र एकमंच पर आ गए हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने विवि का नाम न बदलने की मांग उठाई।
छात्रों ने विधानसभा तक रैली निकाली और सांकेतिक धरना दिया। छात्रों ने सिटी मजिस्ट्रेट जीसी गुणवंत के माध्यम से सीएम को ज्ञापन भी भेजा। छात्रों का कहना था कि विवि को किसी किसी धर्म या वर्ग विशेष से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
इस मामले की कोई आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं मिली है। कोई शासनादेश आएगा तो उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।
- प्रो. वीके जैन, कुलपति, दून विवि