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दो यूनिवर्सिटी के कुलपतियों में खींची तलवारें

Tue, 25 Feb 2014 02:45 PM IST
अमर उजाला, नई टिहरी
अमर उजाला, नई टिहरी Updated Tue, 25 Feb 2014 02:45 PM IST
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dispute between vice chancellor

श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति तथा गढ़वाल विवि के पूर्व कुलसचिव डॉ. यूएस रावत और गढ़वाल विवि के कुलपति डॉ. एसके सिंह में ठन गई है।

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मानहानि का दावा करने का निर्णय
वर्ष 2012 में पीआरओ और सहायक कुलसचिव पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा में पूर्व कुलसचिव को गढ़वाल विवि के कुलपति द्वारा दोषी बताए जाने पर रावत ने कुलपति के खिलाफ मानहानि का दावा करने का निर्णय लिया है।

यदि कुलपति प्रो. सिंह को उक्त परीक्षा के संबंध में मुझसे कोई शिकायत थी तो मेरे कुलसचिव पद पर रहते हुए उस जांच रिपोर्ट पर क्यों कोई कार्रवाई नहीं की गई। कुलपति प्रो. सिंह का कार्यकाल 27 फरवरी को खत्म हो रहा है।
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कार्यकाल खत्म होने से दो दिन पहले ही क्यों उन्हें दोषी पाया गया। रावत ने इसे सड़यंत्र बताते हुए कहा कि उनका नाम गढ़वाल विवि के कुलपति सर्च कमेटी के पैनल में है। मैं गढ़वाल विवि में कुलपति बनकर न पहुंच पाऊ इसलिए रणनीति के तहत यह सड़यंत्र किया गया है।
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गढ़वाल विवि के कुलपति ने लगाए आरोप
जारी बयान में कुलपति डॉ. रावत ने कहा कि गढ़वाल विवि के कुलपति के आरोप लगाने से यह प्रतीत होता है कि वे मेरे श्रीदेव सुमन विवि के कुलपति के रूप में मेरी कार्यशैली, क्षमताओं व निकट समय में गढ़वाल विवि के कुलपति बनने की राह में बाधाएं उत्पन्न कर रहे हैं।

अच्छा होता कि प्रो. सिंह गढ़वाल विवि में अपने 5 साल के कार्यकाल की उपब्धियों को बताते। छात्र-छात्राओं को कैंपस वैटेज दिलाने, विवि में वर्षों से कार्य कर रहे दैनिक/नियत कर्मचारीयों और अंशकालिक शिक्षकों के स्थाईकरण तथा शिक्षकों की लंबित मांगों का समाधान कर अपनी उपयोगिता सिद्ध करवाते।

उन्होंने बताया है कि कुलपति प्रो. सिंह ने ही सहायक कुलसचिव और पीआरओ के पदों पर नियुक्ति के लिए विवि के तत्कालीन वित्ताधिकारी प्रो. एसके श्रीवास्तव को संयोजक नियुक्त किया था।

परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत
परीक्षा संयोजक ने ही उक्त पदों के परीक्षा के प्रश्न-पत्र तैयार करवाए थे। उनकी देखरेख में ही इन प्रश्न-पत्रों से परीक्षा करवाई गई। इस परीक्षा से कुलसचिव का कोई भी लेना-देना नहीं था।

परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायत पर पूर्व में विवि ने प्रो. एनएस पंवार और प्रो. डीएस नेगी की एक कमेटी गठित की गई थी और इस कमेटी ने जांच कर निर्णय दिया था कि प्रश्न-पत्र पाठ्यक्र्तम के अनुसार नहीं था।


ओएमआर सीट पर अभ्यर्थियों के नाम भी लिखे थे। प्रवेश पत्र एवं जांच पत्रों की जांच नहीं की गई थी। कहा कि इस जांच कमेटी की संस्तुति पर कार्रवाई होनी चाहिए थी।

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