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शिक्षक पदों पर रोस्टर प्रणाली बनी गले की फांस

Sat, 25 Jan 2014 09:58 AM IST
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
आशीष त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 25 Jan 2014 09:58 AM IST
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dipute in proffesors of lucknow university

एलयू में शिक्षकों के पदों पर रोस्टर प्रणाली लागू करना गले की फांस बन गया है। नैक मूल्यांकन के लिए शिक्षकों के खाली पद भरने की कवायद शुरू नहीं हो पा रही है।

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विवि प्रशासन इस मंथन में जुटा है कि सरकार द्वारा बनाए नए नियम व कानून के अनुसार पदों पर आरक्षण लागू किया जाए या पहले इन्हें समायोजित कर लिया जाए और फिर बचे पदों का विज्ञापन निकाला जाए।
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फिलहाल इसे लेकर एलयू में रार मची हुई है। इसे लेकर विवि में शिक्षक दो धड़े में बंट गए हैं। एक आरक्षण समर्थक शिक्षक जो कि हर कीमत पर आरक्षण का लाभ दिलाना चाहते हैं और दूसरे वे जो पहले समायोजन करके ही आरक्षण लागू करने के पक्ष में हैं।
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फिलहाल शुक्रवार को कुलपति डॉ. एसबी निमसे की अध्यक्षता में चली बैठक बेनतीजा रही। लखनऊ विश्वविद्यालय में वर्ष 2004 में 52 शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी और इसे लेकर विवि व तत्कालीन सरकार के बीच खींचतान भी हुई थी।

मगर एलयू ने इन सभी शिक्षकों को ज्चॉइन करवा लिया था। इसमें से कई शिक्षक पदों के सापेक्ष समायोजित हो गए, कुछ बीते वर्षों में समायोजित हो गए लेकिन अभी तीसरे वर्ग में छह शिक्षक ऐसे बचे हैं जो कि पदों के सापेक्ष अभी तक समायोजित नहीं हो पाए हैं।

इनमें शिक्षा शास्त्र विभाग में डॉ. किरण लता डंगवाल, हिन्दी विभाग में डॉ. रंजना वैशम्पायन, बॉटनी विभाग में डॉ. एसएन पांडेय और गणित विभाग में डॉ. एनवीसी शुक्ला, डॉ. स्वर्णिमा बहादुर, डॉ. निधि पांड्या शामिल हैं।

अगर गणित विभाग में खाली पदों पर आरक्षण देखा जाए तो यहां जनरल कैटेगरी का एक पद है और ओबीसी के दो पद खाली हैं। ऐसे में वर्तमान में गणित विभाग में जो तीन शिक्षक हैं वह सामान्य वर्ग में समायोजित नहीं हो सकते।

मगर एक दूसरा पहलू यह भी है कि यहां पर शिक्षकों के कुल 12 में से 6 पदों पर पहले ही आरक्षण लागू है। ऐसे में अगर अब 2 पद और ओबीसी कोटे में चले गए तो आरक्षण का गणित ही बिगड़ जाएगा।

फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन इन छह शिक्षकों को समायोजित करने के लिए उधेड़बुन में लगा हुआ है। फिलहाल चक्रानुक्रम के साथ-साथ यूनिवर्सिटी के पास नियमों के अनुसार दो रास्ते और हैं।

इसमें वह बड़े विभाग व छोटे विभाग को विभाजित कर रोस्टर प्रणाली लागू करे और तीसरा यह कि वह इस बात पर ध्यान दे कि आरक्षण का फॉर्मूला कम या ज्यादा न हो जाए।


मगर विवि प्रशासन का ध्यान इस ओर नहीं जा पा रहा। फिलहाल यूनिवर्सिटी प्रशासन अभी शनिवार को भी इस मुद्दे पर मंथन करेगा इसके बाद वह कोई अंतिम नतीजे पर पहुंचेगा।

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