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इस फैसले के बाद युवाओं को लगानी होगी दूसरे राज्यों की दौड़
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 06 Mar 2014 02:04 PM IST
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बदहाल व्यवस्थाओं के कारण डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन(डीएलएड) के लिए उत्तराखंड के किसी भी डायट को मान्यता नहीं मिली है।
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दाखिले का नोटिफिकेशन जारी हुअा
जबकि उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद दाखिले का नोटिफिकेशन जारी कर चुका है। ऐसे में प्रदेश के लाखों युवाओं को एक बार फिर दूसरे राज्यों की दौड़ लगानी होगी।
इस फैसले के साथ बदहाल शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के प्रति सरकार की गंभीरता का सच एक बार फिर सामने आ गया है।
सरकार ने निजी बीएड संस्थानों में डीएलएड न कराने का नियम पहले ही नेशनल काउंसिल फोर टीचिंग एजूकेशन (एनसीटीई) को भेज दिया था।
15 मार्च से शुरू होनी थी आवेदन प्रक्रिया
साथ ही सभी जिलों के डायट (डिस्ट्रिक्ट इंस्टीट्यूट ऑफ एजूकेशन एंड ट्रेनिंग) में यह कोर्स कराने का नोटिफिकेशन जारी किया गया था। 15 मार्च से प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू होनी थी।
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लेकिन, एनसीटीई की ओर से सत्र 2014-15 के लिए हाल में जारी उत्तरी क्षेत्र की मान्यता सूची में प्रदेश के किसी भी डायट का नाम शामिल नहीं है। सूची में केवल उत्तर प्रदेश, हिमाचल, हरियाणा और पंजाब के संस्थानों को मान्यता दी गई है।
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एनसीटीई के क्षेत्रीय निदेशक के अनुसार मान्यता की प्रक्रिया उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार केवल तीन मार्च तक ही पूरी की जा सकती है। जिन संस्थानों को मान्यता नहीं मिली है, उन्हें अब सत्र 2015-16 में नए सिरे से आवेदन करना होगा।
क्यों जरूरी है डीएलएड
31 मार्च 2014 के बाद डीएलएड पास अभ्यर्थी ही प्राइमरी शिक्षक बनने के योग्य होंगे। एनसीटीई ने कुछ माह पहले शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत यह नियम लागू किया है। अभी तक के नियमों के मुताबिक डीएलएड के बजाए बीएड और टीईटी पास प्राइमरी शिक्षक बन सकते थे।
इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं
प्रदेश के सभी डायट संस्थानों ने डीएलएड मान्यता के लिए आवेदन किया था। एनसीटीई ने जब मानकों की जांच की तो पता चला कि इस कोर्स को संचालित करने के लिए किसी भी संस्थान के पास मानक पूरे नहीं थे।
इस संबंध में एनसीटीई ने पत्र भेजा लेकिन विभाग ने कोई जवाब नहीं दिया। नतीजतन किसी भी डायट को मान्यता नहीं मिल पाई।
298 संस्थानों को मान्यता
एनसीटीई के उत्तरी क्षेत्रीय कार्यालय की 225वीं बैठक 25 फरवरी से एक मार्च के बीच आयोजित हुई। इसमें देश के कुल 298 संस्थानों को सत्र 2014-15 के लिए बीएड और डीएलएड की मान्यता दी गई है। इनमें से 81 संस्थानों को डीएलएड और 217 संस्थानों को बीएड की मान्यता दी गई है।
बिना मान्यता डीएलएड में एडमिशन नोटिफिकेशन जारी करना समझ से परे है। मान्यता न मिलने के कारण प्रदेश के युवा दूसरे राज्यों की ओर पलायन को मजबूर होंगे। सरकार को इसके लिए बीच का रास्ता निकालना चाहिए।
- सुनील अग्रवाल, अध्यक्ष, सेल्फ फाइनेंस इंस्टीट्यूट एसोसिएशन