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अब स्टूडेंट्स की राय से होंगे डिसीजन
आशीष त्रिवेदी/लखनऊ
Updated Wed, 30 Oct 2013 01:30 AM IST
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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में स्टूडेंट से जुड़े फैसले पर उनकी राय को भी महत्व दिया जा रहा है। यहां पर एकेडमिक काउंसिल प्रवेश व कोर्स से संबंधित जो भी नियम बनाती है।
उसमें प्रतिनिधि के तौर पर दो छात्र भी शामिल किए जा रहे हैं। वर्ष 2013-14 में एकेडमिक काउंसिल में स्टूडेंट की ओर से जो दो प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।
उनमें पीएचडी स्कॉलर स्नेहा और समाजशास्त्र विभाग में पीजी के स्टूडेंट अरुण कुमार कुशवाहा शामिल हैं। बीबीएयू के कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने इन दोनों का चयन किया है।
यही नहीं बीबीएयू में इस बार लाइब्रेरी में जो पांच हजार किताबें खरीदी गई हैं वे सब छात्रों की पसंद की हैं। छात्रों की मनपसंद किताबों के साथ-साथ उनकी सुविधा के लिए लाइब्रेरी का समय भी सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक कर दिया गया है।
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बीबीएयू प्रशासन का कहना है कि एकेडमिक काउंसिल प्रवेश व कोर्स को डिजाइन करने के जो भी नियम बनाती है उसमें स्टूडेंट्स के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल छात्रों का भी पक्ष लिया जाता है।
यह स्टूडेंट विश्वविद्यालय में पढ़ रहे सभी छात्रों की नुमाइंदगी करते हैं और बाकी छात्रों की ओर से अपना पक्ष पेश करते हैं।
यही नहीं बीबीएयू प्रशासन पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कुछ अन्य कमेटियों में भी स्टूडेंट का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है।
इसमें विश्वविद्यालय में सामान की खरीददारी व पुस्तकालय में किताबें खरीदने के लिए बनने वाली कमेटियों में भी सीधे तौर पर स्टूडेंट्स के प्रतिनिधियों को शामिल करने पर विचार हो रहा है।
यानी अब विश्वविद्यालय में जो भी काम होंगे वे स्टूडेंट्स की रजामंदी से होंगे।
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उसमें प्रतिनिधि के तौर पर दो छात्र भी शामिल किए जा रहे हैं। वर्ष 2013-14 में एकेडमिक काउंसिल में स्टूडेंट की ओर से जो दो प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं।
उनमें पीएचडी स्कॉलर स्नेहा और समाजशास्त्र विभाग में पीजी के स्टूडेंट अरुण कुमार कुशवाहा शामिल हैं। बीबीएयू के कुलपति प्रो. आरसी सोबती ने इन दोनों का चयन किया है।
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यही नहीं बीबीएयू में इस बार लाइब्रेरी में जो पांच हजार किताबें खरीदी गई हैं वे सब छात्रों की पसंद की हैं। छात्रों की मनपसंद किताबों के साथ-साथ उनकी सुविधा के लिए लाइब्रेरी का समय भी सुबह 8 बजे से शाम 8 बजे तक कर दिया गया है।
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बीबीएयू प्रशासन का कहना है कि एकेडमिक काउंसिल प्रवेश व कोर्स को डिजाइन करने के जो भी नियम बनाती है उसमें स्टूडेंट्स के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल छात्रों का भी पक्ष लिया जाता है।
यह स्टूडेंट विश्वविद्यालय में पढ़ रहे सभी छात्रों की नुमाइंदगी करते हैं और बाकी छात्रों की ओर से अपना पक्ष पेश करते हैं।
यही नहीं बीबीएयू प्रशासन पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए कुछ अन्य कमेटियों में भी स्टूडेंट का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने पर विचार कर रहा है।
इसमें विश्वविद्यालय में सामान की खरीददारी व पुस्तकालय में किताबें खरीदने के लिए बनने वाली कमेटियों में भी सीधे तौर पर स्टूडेंट्स के प्रतिनिधियों को शामिल करने पर विचार हो रहा है।
यानी अब विश्वविद्यालय में जो भी काम होंगे वे स्टूडेंट्स की रजामंदी से होंगे।