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DU: फिर एक्शन मोड में आए कुलपति
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 23 Aug 2014 09:13 AM IST
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दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर दिनेश सिंह एक बार फिर एक्शन मोड में आ गए हैं।
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उन्होंने सीपीएफ (कॉन्ट्रिब्यूटरी प्रोविडंट फंड) से जीपीएफ (ग्रैच्युटी प्रोविडंट फंड) का विकल्प लेने वाले मामले में एक पत्र के जरिए शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने अपनी बात रखी है। इस खुले पत्र में कुलपति ने डीयू बारे में भ्रामक सूचनाएं फैलाने पर नाराजगी जताई है।
पत्र में कुलपति ने कहा है कि जिन भी लोगों का पेंशन का मामला था, उस संबंध में कोर्ट ने दी जा रही पेंशन को बिना मंजूरी खर्च (अनअप्रूव्ड एक्सपेंडीचर) बताया है। लिहाजा इसके लिए डीयू हाईकोर्ट से अपील करने के साथ-साथ सरकार से भी बात करेगी।
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पत्र में साफ किया गया है कि सीपीएफ-जीपीएफ मामले में डीयू प्रशासन 2011 से शिक्षकों के हितों के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि आगे भी कर्मचारियों और शिक्षकों के हित में कार्य किया जाएगा।
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गौरतलब है कि 1988 से 1999 में डीयू ने सीपीएफ से जीपीएफ में जाने का विकल्प दिया था। लेकिन कुछ शिक्षकों ने सीपीएफ को ही चुना। ऐसे में कुछ शिक्षकों के वर्ष 2007 में कोर्ट जाने से जीपीएफ का हिस्सा बनने की मंजूरी मिल गई। लेकिन जिन्हें पेंशन मिल रही थी, उसे कोर्ट ने बिना मंजूरी खर्च बताया। ऐसे में शिक्षकों की पेंशन रुकने की स्थिति बन गई।